
उत्तराखंड राज्य में ई – फॉरेंसिक 2.0 की शुरुआत हो चुकी है ऐसे में अब एक साथ फॉरेंसिक लैब ,अभियोजन विभाग ,कोर्ट और जेल सभी सक्रिय हो जाएंगे। थाने में प्राथमिकी दर्ज होते ही फॉरेंसिक लैब अभियोजन विभाग समेत अन्य विभाग सक्रिय होंगे। ई- फॉरेंसिक 2.0 की शुरुआत होते ही थाने से लेकर कोर्ट, जेल सभी एक ही प्लेटफार्म से जुड़ गए हैं और पहले जहां फोरेंसिक जांच के परिणामों को कोर्ट में पहुंचने में महीनो का समय लगता था अब वह कुछ हफ्तों में ही कोर्ट तक पहुंच जाएगी। प्रदेश के दोनों लैब यानी कि देहरादून और रुद्रपुर में बीते शनिवार से इसकी औपचारिक शुरुआत हो गई है। देहरादून के डायरेक्टर फॉरेंसिक लैब डॉक्टर नीलेश आनंद भरणे और रुद्रपुर में प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉक्टर मनोज कुमार द्वारा इसकी शुरुआत की गई है। पहले से थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फोरेंसिक जांच के नमूने में वक्त लगता था और इसके बाद जांच के लिए इन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा जाता था और रिपोर्ट आने के बाद पत्राचार होता था इस तरह काफी अधिक समय लगता था मगर अब एक साथ सभी कार्य काफी शीघ्रता से होंगे।

