पिथौरागढ़ के इन गांवों को करनी पड़ती है स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 30 किलोमीटर की यात्रा

पिथौरागढ़। वैसे तो वर्तमान में उत्तराखंड के कई गांव सड़क से वंचित है मगर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के कुछ गांवो से सड़क इतनी दूरी पर है और स्वास्थ्य सेवाएं यानी कि अस्पताल तक पहुंचने में लोगों को 30 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। पिथौरागढ़ के यह गांव है कनालीछीना, काणाधार और मलान । इन गावों में रह रहे नागरिकों को अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 30 किलोमीटर का सफर तय करना होता है।

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यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो गांव के लोग 10 किलोमीटर पैदल यात्रा करके छड़नडेव तक पहुंचते हैं तथा वहां से वाहन से यात्रा करके फिर 10 किलोमीटर की दूरी पर कनालीछीना पहुंचते हैं और अगर यदि वहां भी इलाज नहीं मिला तो फिर से 10 किलोमीटर की यात्रा करके पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय आना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दशकों से सड़क की मांग कर रहे हैं मगर फिर भी शासन-प्रशासन उनकी तरफ अनदेखी कर रहा है। उनका कहना है, कि यदि उनके गांव में रात को कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस की जगह ग्रामीण उसे डोली में ले जाते हैं। और गांव में सड़क न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना था कि सड़क सुविधा के अभाव में कई ग्रामीणों ने गांव में रहने की जगह पलायन का रुख अपनाकर देहरादून हल्द्वानी जैसे शहरों में बसना सही समझा जिसके कारण जहां पहले गांव की आबादी हजार के करीब थी अब मात्र 600 रह गई हैं।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पिछली बार सड़क मांग के लिए चुनाव बहिष्कार किया था मगर अब फिर से चुनाव आ रहे हैं तो जनप्रतिनिधि भी उनके गांव का दौरा करने जरूर आएंगे और तब ग्रामीण उनके समक्ष फिर से सड़क की मांग करेंगे।