
अल्मोड़ा। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे), उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में आयोजित तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला के द्वितीय दिवस ने प्रतिभागियों के मन-मस्तिष्क पर गहरी छाप छोड़ी।
इस अवसर पर योग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद भट्ट के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित सत्रों में “गंगा एवं जल के चिकित्सकीय महत्व” को केंद्र में रखते हुए ज्ञान और प्रयोग का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रथम सत्र में डॉ. नवीन भट्ट का प्रेरणादायी एवं वैज्ञानिक संबोधन द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में डॉ. नवीन भट्ट ने अपने प्रभावशाली उद्बोधन में कहा—
“गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवन, ऊर्जा और चिकित्सा का दिव्य स्रोत है।”
उन्होंने अपने विचारों को और अधिक प्रभावशाली बनाते हुए कुछ सरल लेकिन गहरे उदाहरण प्रस्तुत किए—
“जिस घर में धूप और स्वच्छ जल का सही उपयोग नहीं होता, वहां बीमारियां अपने आप रास्ता बना लेती हैं; लेकिन जहां जल का सही प्रयोग होता है, वहां शरीर स्वयं ही रोगों से लड़ने लगता है।” (वैज्ञानिक दृष्टिकोण):
“जल चिकित्सा शरीर के तापमान, रक्त संचार और तंत्रिका तंत्र को संतुलित कर शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करती है।”
उन्होंने वेद, पुराण और आयुर्वेद के संदर्भों के साथ आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जोड़ते हुए जल के महत्व को अत्यंत सरल और प्रभावशाली भाषा में समझाया, जिससे सभी प्रतिभागी गहराई से प्रभावित हुए।
तदुपरांत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गिरीश अधिकारी ने जल चिकित्सा के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रोगों के उपचार की विधियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उनके प्रेरक शब्दों ने छात्र-छात्राओं में उत्साह और जिज्ञासा का संचार किया।
द्वितीय सत्र: अनुभव से सीख — जल स्नान की अद्भुत विधाएं
इस सत्र में प्रतिभागियों को कटी स्नान, रीढ़ स्नान, गरम पाद स्नान, हस्त स्नान एवं भाप स्नान जैसी विधाओं का प्रयोगात्मक अभ्यास कराया गया।
विशेष बात यह रही कि कई साधकों को घुटने व कमर दर्द में तुरंत राहत का अनुभव हुआ।
तृतीय सत्र: गीली पट्टी चिकित्सा का प्रभावी प्रयोग
डॉ. अधिकारी ने गीली पट्टी (Wet Pack) की विभिन्न विधाओं का लाइव प्रदर्शन कराया—
उदर, छाती, गले एवं घुटने की गीली पट्टी के माध्यम से रोग निवारण की सरल एवं प्रभावशाली तकनीकों को सिखाया गया।
अन्य वक्ताओं के विचार
हेमलता अवस्थी ने जल को “जीवन की औषधि” बताते हुए इसके नियमित उपयोग पर जोर दिया।
लल्लन कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं समाज को स्वस्थ दिशा प्रदान करती हैं।
छात्र-छात्राओं का उत्साह — कार्यशाला की असली सफलता
योग विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए हर सत्र में सक्रिय भूमिका निभाई।
प्रयोगात्मक गतिविधियों में उनकी रुचि और सहभागिता इस कार्यशाला की सफलता का प्रमुख आधार रही।
समापन संदेश
द्वितीय दिवस ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिले, तो जल ही जीवन नहीं, बल्कि संपूर्ण चिकित्सा का आधार बन सकता है।
डॉ. नवीन भट्ट के कुशल नेतृत्व में यह कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि प्रतिभागियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे गई।
कार्यशाला में योग विज्ञान विभाग के निम्न विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया नेहा आर्य ,गीतांजलि
नीतू ,हेमलता ,हर्षिता नेगी ,पंकज सिंह राठौर ,ज्योति जीना ,योगेश पाल ,अर्चना
पूजा बोरा , आशीष संतोलिया
परवल सुयाल ,कमलेश पाठक ,अनुराधा धामी ,आदित्य बिष्ट ,मोहिता पंत ,रिया जोशी ,कमला फर्त्याल,ललिता
,प्रकाश भट्ट ,किरन बिष्ट
नेहा ,खुशी बिष्ट ,यामिनी लसपाल ,रितु बिष्ट ,भावना बिष्ट
निकिता मेहरा ,दिव्य रावत ,भावना ,योगिता पंत ,मीनाक्षी नेगी,तनुजा पंत ,आदि उपस्थित रहे।

