आइए कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ते हैं राकेश उप्रेती की स्वरचित कविता “हरियाव त्यार “

” हरियाव त्यार “

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दस दिन पैलि बांस क डलिया
में साफ़ जागोक माटा लिभैर ,यो माट टोकरी में भरी जा फिर यमे उनी वाल फसल धान,मक्का,गेहूँ, जौं ,झंगोरा,भट्ट, गैहत बोई जानि
दस दिन तक यमें रोज पाणि दी जा
येक पूज करि जा
दिन -दिन हरियाव बड़ जां
मान्यता छु जैक जतुक ठुल हरियाव होल उक उतुक भल फसल हौल .
फिर नौं दिनै की रात में शुद्ध जागबे माटा लिभिर दिकार बणाई जाणि
यानि गौरा, शिव जीक परिवार
फिर उक पूज करि जां पकवान बणाई जानि
मान्यता छ कि आजै क दिन
गौरा – शिव जीक ब्याह भौ
फिर उ दसूं दिन हरियाव त्यार क दिन
रात उठि नहा बैर हरियाव गौढ़ि जा फिर काटि जा
घरन में पकवान पुआ,पूरी,सिंगल, बाड़ बनाई जानि
फिर सबहे पैलि इष्ट देव नेक मंदिर में पूजा करि जा हरियाव चढ़ाई जा
पकवान चढ़ाई जानि
प्रार्थना करि जा
भगवान हमर घर की रक्षा करिया घर में सुख , शांति , समृद्धि हेजो रोग दुख सब दूर करिया और सब जाणि स्वस्थ धरिया
हमर खेत-खलिहान भरिया बाकि लै
फिर पूर परिवार का मेष एक जाग बैठ बेर हरियाव पूजि नी एक दूसार माथ में हरियाव धरनि
ओर कूनि
“जी रया, जागि रया, यो दिन यो बार, भेटने रया,दुबक जस जड़ हैजो, पात जस पौल है जो,स्यालक जस त्राण है जो,
धरती जस चकोव ,आकाश जस चकोव है जाया
सिंह जस बलि रया
दूब जस फलि फूलि रया
हिमालय में ह्यू छन तक, गंगा में पाणी छन तक,हरेला त्यार मानते रया, जी रया जागि रया

यो हरियाव सिर्फ एक त्यार नी छ
यो हमार उत्तराखण्ड क हरियालिक शान छ
प्रकृति लिजि प्यार छू
धरती बचाण लिजि एक सौच छू !!

🌼हरेला त्यार की पुरा परिवार लै भौत-भौत बधै हो 🙏🌼

🌼जय देवभूमि , जय उत्तराखण्ड 🌸

🌼आप सबको पूर परिवार सहित उत्तराखंड लोक पर्व हरियाव की बहुत-बहुत शुभकामनाएं छु 🌸

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