आइए कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ते हैं रतनसिंह किरमोलिया की दीपावली पर स्वरचित कविता

दीपावली

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दीपावली है दिए जलाएं
बिछुड़ गए जो गले लगाएं।
प्रेम अहिंसा की बाती से
सत्य की सब जोत जलाएं।।
सत्कर्मों के दिए जलाकर
आलस तम को दूर भगाएं।
मानव से मानव मिला कर
इस वसुधा को स्वर्ग बनाएं।।
जगमग जगमग सबके मन में
ज्ञान विज्ञान के दिए जलाएं।
प्रेम प्यार के खील खिलौने
बांटें खाएं खुशी मनाएं।।
दीप पर्व पर सबका वंदन
दीप पर्व पर हो अभिनंदन।
हर बर्ष मनाते रहें दिवाली
इसी शुभकामना का हो वर्धन।।


** रतनसिंह किरमोलिया

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