
अल्मोड़ा, 31 अक्टूबर। अयोध्या में 30 अक्टूबर 1990 को हुई प्रथम कारसेवा की 36वीं वर्षगांठ के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद, अल्मोड़ा की ओर से नगर निगम सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन में बलिदान देने वाले कारसेवकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके उपरांत मल्ला महल स्थित राम मंदिर में 251 दीप प्रज्वलित कर दीपोत्सव मनाया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक कमल जी ने अपने संबोधन में राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्ष और उसके विभिन्न पड़ावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित मंदिर को लेकर हिंदू समाज ने सदियों तक संघर्ष किया। उनके अनुसार, वर्ष 1528 में मुगल आक्रांता बाबर के शासनकाल में मंदिर को ध्वस्त कर वहां बाबरी ढांचा बनाया गया था। इसके बाद मुगल शासन, अंग्रेजी हुकूमत और स्वतंत्र भारत में भी राम जन्मभूमि को लेकर संघर्ष जारी रहा।
उन्होंने कहा कि 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवा के आह्वान के साथ राम जन्मभूमि आंदोलन ने व्यापक स्वरूप ग्रहण किया। इस आंदोलन ने देशभर में हिंदू समाज को एकजुट किया। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे के ध्वस्त होने के बाद रामलला को अस्थायी रूप से खुले आसमान के नीचे विराजमान किया गया। इसके पश्चात लंबे न्यायिक संघर्ष और सामाजिक प्रयासों के परिणामस्वरूप अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हुआ। उन्होंने कारसेवकों के त्याग, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।
राजीव गुरुरानी ने प्रस्तुत की अल्मोड़ा की ऐतिहासिक घटना पर डॉक्यूमेंट्री
कार्यक्रम में वर्ष 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवक राजीव गुरुरानी एवं रंजीत भंडारी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मनीष कुमार जोशी एवं राजीव गुरुरानी द्वारा तैयार की गई लगभग 10 मिनट की डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें 13 अक्टूबर 1990 को अल्मोड़ा में घटित घटनाक्रम को प्रदर्शित किया गया। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से स्थानीय स्तर पर राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रम और उससे जुड़ी स्मृतियों को सामने लाने का प्रयास किया गया।
राजीव गुरुरानी का वक्तव्य:
राजीव गुरुरानी ने कहा कि वर्ष 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अल्मोड़ा में जो घटनाक्रम हुआ, वह यहां के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उस समय अनेक कार्यकर्ताओं और रामभक्तों ने कठिन परिस्थितियों में आंदोलन में भाग लिया। आज की पीढ़ी को उस संघर्ष और उससे जुड़ी घटनाओं की जानकारी होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 13 अक्टूबर 1990 को अल्मोड़ा में हुई घटना पर डॉक्यूमेंट्री तैयार की गई है, ताकि उस दौर की स्मृतियां और कारसेवकों का योगदान आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।
गोविंद रावत का वक्तव्य:
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष गोविंद रावत ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन केवल मंदिर निर्माण का संघर्ष नहीं था, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा विषय था। इस आंदोलन में असंख्य लोगों ने अपना योगदान दिया। कारसेवकों के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराना हम सभी का दायित्व है।
कार्यक्रम का संचालन जिला मंत्री विजय सिराड़ी ने किया। इस अवसर पर महापौर अजय वर्मा, विश्व हिंदू परिषद के संगठन मंत्री वेद प्रकाश, पूर्व विहिप अध्यक्ष विपिन भट्ट, पूर्व जिला अध्यक्ष रवि रौतेला, ललित लटवाल,भाजपा उपाध्यक्ष धर्मेंद्र बिष्ट, बजरंग दल संयोजक वैभव जोशी, मनोज रावत, हेमंत रावत, जितेंद्र बिष्ट, राजेंद्र मेहता, गोपाल नयाल, राजीव राज गुरुरानी, मनोज सनवाल, त्रिलोचन जोशी, जिला अध्यक्ष महिला मोर्चा पूनम पालीवाल, शांति नयाल , दीपा बिष्ट,दिनेश मठपाल , ईश्वर उपाध्याय, विनीत पांडे, मनीष जोशी, संजय भट्ट ,संजय सेनारी, गौरव पांडे, अमन मेहता, सुभाष तिवारी, रुद्राक्ष गुरुरानी सहित अनेक गणमान्य लोग एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन कारसेवकों के बलिदान को नमन करने तथा भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ।




