आइए कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ते हैं राकेश उप्रेती की स्वरचित कविता “आज भाद्रपद की पंचमी आई है”

आज भाद्रपद की पंचमी आई हैं
पूरे कुमाऊं में खुशियां छाई है
बेटी बहु सब जुट गई हैं
सातों – आठों का पर्व आया है

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आज कही इसे गमरा तो कहीं सातों आठों कहते हैं
कहीं ये सात दिन का होता है
कहीं कहीं ये तीन दिन में पूरा हो जाता है
पर भाव एक ही रहता है
शिव – पार्वती का विवाह मनाना है !!

पहला दिन ” बिरूद पंचमी ” कहलाता है
साबुत चनो को भिगोकर ताँबे के बर्तन में रखा जाता है
बर्तन के चारो तरफ गाय का गोबर लगाया जाता है
माताएं बहने सब दिया जला कर व्रत रखती है
कहती है आज गौरी शंकर का ब्याह है !!

दूसरे दिन एक साफ बर्तन में
सात अनाज की टोकरी सजाई जाती है
गेहूं, जौ , चना, मक्का ,धान आदि उसमें सजाएं जाते है
ये हरियाली का प्रतीक है
हमारे लिए सुख – समृद्धि का आशीर्वाद है !!

तीसरे दिन माता पार्वती पिता शिव की मूर्ति बनाई जाती है
इनको संपूर्ण श्रृंगार वस्त्रों से सजाया जाता है
बेलपत्र ,धतूरा, दूब, फूल से फिर पूजा होती हैं
दोलक, आदि संग फिर भजन चलते है !!

अब सुनो सबसे जरूरी बात
ये व्रत किसके लिए है खास

कुंवारी बेटियां रखती हैं व्रत
माता -पिता की लंबी उम्र की आस
मेरे माता – पिता सौ साल जिएं
भोलेनाथ से करते है यही अरदास !!

विवाहित महिलाएं भी रखती हैं व्रत
पति की लंबी आयु के लिए
गले में दुब का धागा बांधती हैं
हाथ में सात गांठ का डोरा पहनती हैं
मेरे सुहाग की रक्षा करना
गौरा मैया से यही मांगती हैं !!

चौथे दिन फिर विवाह की रस्म होती है
शिव – पार्वती का विवाह रचाया जाता है
पूजा की जाती है
पूरी ,खीर, आदि सब बनते हैं
सब आपस में मिलकर हर हर महादेव गाते हैं !!

पांचवे दिन विदाई का दिन फिर आता है
पार्वती माता मायका छोड़कर कर तब जाती है
हर किसी की आँखें तब भर आती है
जा बेटी सुखी से रहना सब कहती हैं !!

छठे दिन कथा पूजा सब होती है
घर घर भजन कीर्तन सब होता है

सातवें दिन अब आता है त्यौहार का अंतिम दिन
नदी, कुआं में जाकर विसर्जन अब होता है
हे भोले बाबा अगले साल फिर आना
पूरे परिवार को संग लाना
सब हाथ जोड़कर यही कहते हैं !!

सातों -आठों सिर्फ त्योहार नहीं ये रिश्तों की एक डोर है
बेटी माता पिता का प्यार है
पति – पत्नी का भरोसा है !!

हे भोलेनाथ , हे गौरा मैया
हमारे सुहाग को लंबी उम्र देना
परिवार को हमेशा खुशहाल रखना
हमारे पहाड़ों को हरा भरा रखना
और ये परंपरा यूं ही चलाते रहना
ये सब भगवान से कहते हैं !!

आप सभी को उत्तराखंड के पावन पर्व
“सातों-आठों” की हार्दिक शुभकामनाएं
भोलेनाथ और माता पार्वती का आशीर्वाद आप सब पर बना रहे !!

जय देवभूमि जय उत्तराखण्ड

राकेश उप्रेती
अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

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