अनिवार्य मतदान विधेयक-2022 -: मतदान न करने पर सजा और लगातार मतदान करने पर प्रोत्साहन, पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली| अनिवार्य मतदान विधेयक-2022 पर राष्ट्रपति द्रोपति मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 117 के तहत विचार करने की अनुशंसा कर दी है|

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बताते चलें कि, भाजपा सांसद दीपक प्रकाश ने 22 जुलाई को इस बिल को निजी सदस्य विधेयक के तौर पर पेश किया था| इस निजी विधेयक के वित्तीय प्रभाव की वजह से सदन को विचार करने और पारित करने से पहले राष्ट्रपति की संवैधानिक मंजूरी जरूरी थी जो संविधान के अनुच्छेद 117 के तहत वित्तीय विधेयकों के संबंध में विशेष प्रावधानों से संबंधित है| आने वाले शीतकालीन सत्र में इस बिल पर चर्चा हो सकती है|
आप सभी के मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि अनिवार्य मतदान विधेयक-2022 क्या है?
बताते चलें कि, झारखंड भाजपा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने 22 जुलाई 2022 को यह निजी विधेयक पेश किया और कहा कि बहुत से प्रयासों के बाद देश में 60 फ़ीसदी से ज्यादा मतदान नहीं होता है| दुनिया भर में ऑस्ट्रेलिया, मैक्सिको, यूनान जैसे कई देश है जहां मतदाताओं के लिए मतदान करना अनिवार्य है| इस बिल में वोट नहीं डालने पर सजा और लगातार वोट डालने पर प्रोत्साहन का प्रावधान है|