
रिपोर्टर -रमेश चन्द्र पाण्डेय ( बृजवासी)

डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में डायट डीडीहाट में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी के तीसरे दिन ‘बाल साहित्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण’ विषय पर बोलते हुए बालसाहित्य संस्थान दरभंगा के निदेशक डा सतीश चंद्र भगत ने कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। अपने दैनिक जीवन में हम प्रतिदिन विज्ञान के प्रयोग करते हैं। हमारे घर के किचन में विज्ञान के कई प्रयोग होते हैं। भीलवाड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बाल वाटिका की उप संपादक रेखा लोढ़ा ने कहा कि विज्ञान लेखन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अलग-अलग विषय है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों के पास नेट के माध्यम से सारा ज्ञान है इसलिए सूचनात्मक साहित्य के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित साहित्य बच्चों के लिए लिखने की जरूरत है। बालसाहित्य संस्थान सिरसा (हरियाणा) की निदेशक डा शील कौशिक ने कहा कि आज बालसाहित्य बहुत लिखा जा रहा है। उसे बच्चों तक पहुंचाना अपने आप में चुनौती है। शिमला, हिमाचल प्रदेश से आए वरिष्ठ साहित्यकार हरदेव धीमान ने कहा कि बच्चों के लिए तर्कसंगत बालसाहित्य लिखा जाना चाहिए।
अध्यक्षता करते बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के अध्यक्ष रतनसिंह किरमोलिया ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए बालसाहित्य के विभिन पक्षों पर अपनी बात रखी। अभिक कुमार डे (त्रिपुरा), डॉ. रश्मि अग्रवाल (दिल्ली), रजनीकांत शुक्ल(गाजियाबाद), लखन प्रतापगढ़ी (प्रयागराज), डॉ चेतना उपाध्याय (अजमेर, राजस्थान), डॉ अशोक गुलशन(बहराइच), हेमंत जायसवाल (धनबाद, झारखंड) आदि ने भी आज अपने विचार रखे। डायट प्राचार्य भाष्करानंद पांडे ने डायट की ओर से सभी का आभार व्यक्त किया।
बालसाहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए उत्तरकाशी के वरिष्ठ कहानीकार डां महावीर रवांल्टा को कल्याण सिंह बिष्ट बालसाहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रो जगतसिंह बिष्ट, यामिनी जोशी, परमेश्वरी शर्मा, दीक्षा जोशी, कैलाश डोलिया, डॉ दीपा कांडपाल, सुधा भार्गव, लक्ष्मी खन्ना ‘सुमन’,, के पी एस अधिकारी आदि के सहयोग से रुखसाना बानो, डॉ इंदु गुप्ता, लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, अनिल कुमार ‘निलय’, कन्हैया साहू, दीक्षा जोशी, डॉ महावीर रवांल्टा सहित 23 साहित्यकारों को बालसाहित्य सम्मान 2026 के तहत पत्र पुष्पम, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिह्न देते हुए शाल पहना कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर आईटीबीपी के सेवा निवृत आई जी आनंद निंवडिया, राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय नारायण नगर की प्राचार्य प्रो प्रेमलता कुमारी, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डा एल एम उप्रेती, उत्तराखंड भाषा संस्थान से डा. हयातसिह रावत, राजकीय इंटर कालेज डीडीहाट के प्रधानाचार्य प्रेमसिंह पापड़ा, किताब कौतिक अभियान के हेम पंत, मल्लिकार्जुन स्कूल पिथौरागढ की प्रधानाचार्य दीप्ति भट्ट, गंगा आर्या, नरेंद्रपाल सिंह, धीरज खड़ायत, डॉ रामदुलार सिंह पराया, वीरेंद्र लोढ़ा, डायट के शिक्षक एवं प्रशिक्षु उपस्थिति थे। संगोष्ठी में 116 साहित्यकारों ने प्रतिभाग किया।
आमंत्रित सभी साहित्यकारों को किताब कौतिक अभियान/क्रिएटिव उत्तराखंड के सौजन्य से प्रतीक चिह्न दिया गया। संचालन बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के उपाध्यक्ष नीरज पंत व राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी के डा खेमकरन सोमन ने संयुक्त रूप से किया। अंत में बालप्रहरी संपादक उदय किरौला ने सभी का आभार व्यक्त किया।

