डीडीहाट:- डीडीहाट में राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी में देश की 90 दुर्लभ बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी

रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)

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डीडीहाट (पिथौरागढ़) । जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट तथा बालप्रहरी /बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में डायट डीडीहाट में ‘बालसाहित्य और बच्चे’ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में बच्चों द्वारा विभिन्न-विभिन्न शीर्षकों के साथ बनाई गयी हस्त लिखित पुस्तकें विशेष आकर्षण का केन्द्र रही।
ओस की बूंदें, किलकारी,बाल दर्पण,नया अहसास,बाल मन बाल स्वप्न,रोशनी की तलाश,नई ज्योति,लाड़ी भुली,लाड़ी बैणी बाल कविता व हमरि छपेरी सहित अनेकों पुस्तकें शामिल हैं।उत्तराखंड का बालसाहित्य’ विषय पर आयोजित प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य एवं कुमाउनी पत्रिका के संस्थापक डॉ. हयातसिह रावत ने कहा कि वैश्वीकरण, शहरीकरण व संयुक्त परिवारों के विघटन के कारण आज बच्चों को दादा-दादी व नाना-नानी का प्राकृतिक प्यार नही मिल रहा है। बच्चे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। सत्र के अध्यक्ष रतनसिंह किरमोलिया ने सभी का स्वागत करते हुए उत्तराखंड के बालसाहित्य की पृष्ठभूमि रखी। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले 1936 में अल्मोड़ा से ‘नटखट’ बाल पत्रिका का प्रकाशन होता रहा है। डायट के प्राचार्य भाष्करानंद पाण्डेय ने सभी का स्वागत करते हुए डायट की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए लिखते समय हमें बाल मनोविज्ञान को समझना होगा।
उन्होंने कहा कि देश के दूसरे राज्यों से आए डायट के शिक्षक व साहित्यकारों के अनुभव हमारे प्रशिक्षुओं के लिए महत्वपूर्ण होगा। इस सत्र में डां. चंद्र कला वर्मा, डॉ. धाराबल्लभ पांडेय ‘आलोक’, डॉ. गोविंद सिंह धपोला आदि ने अपने विचार रखे।
‘बालसाहित्य और सोशल मीडिया’ विषय पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता करते हुए सोबनसिंह जीना विश्व विद्यालय अल्मोड़ा की पूर्व शिक्षा संकायाध्यक्ष डां विजया ढौढियाल ने कहा कि मोबाइल युग के आज के दौर में पठन-पाठन की संस्कृति लुप्त होती जा रही है। हम सभी बड़े लोगों को एक शिक्षक, साहित्यकार व अभिभावक बतौर स्वयं में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना होगा। मुख्य अतिथि श्री चित्रेश जी ने अपने अनुभव रखते हुए कहा कि बच्चों की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए समय – समय पर गैर शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन जरूरी है।
भारत ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड – धनबाद से आए हेमंत जायसवाल ने कहा कि मोबाइल आज समय की जरूरत है परंतु बच्चे इसका दुरुपयोग न करें। ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए। बच्चों की पत्रिका ‘मेरी प्यारी बगिया’ के संपादक लखन प्रतापगढ़ी ने कहा कि बच्चों को अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए बाल पत्रिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस सत्र को डां इंदु गुप्ता, आर के साहू आदि ने भी संबोधित किया।
राजकीय इंटर कालेज डीडीहाट के प्रधानाचार्य साहित्यकार प्रेमसिंह पापड़ा की अध्यक्षता में संपन्न अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि डां अशोक गुलशन,इंदु तिवारी, सुल्ताना, के बी मंसारे, रेखा लोढ़ा, रूखसाना बानो, रश्मि अग्रवाल, दीक्षा जोशी, कुसुम चौधरी, कामेश्वरी सिंह, शंकर लाल मजूर, रमेश पांडेय बृजवासी, किरन पंगरिया, बृजमोहन जोशी, रेखा लोढ़ा, रश्मि अग्रवाल, विजय चितौरी, अनिल कुमार निलय, देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव, डॉक्टर पुष्पा सिंह आदि ने अपनी कविताएं सुनाई।

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