
उत्तराखंड राज्य में इन दिनों सशक्त भू कानून का मुद्दा गरमाया हुआ है। बता दे कि कानून बनाने के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत भी उतरे हैं। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि जहां भूमि बेचने के बारे में सोचा भी नहीं जाना चाहिए था वहां जमीन बिक रही है।
इंटरनेट मीडिया पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि भू कानून में संशोधन की मांग को लेकर रैली में उमड़े लोगों का आम दर्द यही था कि कहीं ऐसा ना हो कि हमारी मिट्टी से हमें अलग कर दिया जाए। हमारी धाती ही हमारे लिए पराई ना हो जाए। हरीश रावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने जब प्रदेश का नाम उत्तराखंड से बदलकर उत्तरांचल किया तो ऐसे ही पहचान के संकट से बेचैनी उत्पन्न हो गई थी आज उत्तराखंड की पहचान का यह दर्द प्रदेश के हर क्षेत्र का है। उन्होंने कहा कि हर मुकाम पर एक उत्तराखंडी संस्कृति है जो हमारी साझी संस्कृति के रूप में गौरवान्वित करती है और जमीन ही नहीं रहेगी तो संस्कृति कहां से रहेगी क्योंकि चीजे माटी में अंकुरित होती है और यदि माटी ना रही तो भूमिपुत्र कहां से रहेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को मिट्टी की रक्षा के लिए एकजुट रखना है। इसके अलावा उनका कहना था कि एक आंकड़े के अनुसार पिछले 5 वर्षों में एक लाख से अधिक रजिस्ट्री विभिन्न जिलों में अस्तित्व में आई है और यह कौन से लोग हैं उनकी सूची जिलाधिकारी के पास भी नहीं है यानी कि यह रजिस्ट्री फर्जी है। उन्होंने राज्य में सशक्त भू कानून बनाने को लेकर अपना समर्थन दिया है।

