
रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)
Advertisements

गरुड़ (बागेश्वर) । जब महिलाएं अपने पांवों पर आत्मनिर्भर होने की ठान लेती है। तो वे पीछे कदम हटाने की सोच भी नहीं सकती।सिर्फ उनमें जज्बा होना चाहिए। ऐसा ही एक मामला लोहारी गांव की महिलाओं ने कर के दिखाया।

सीता,अन्जू,दीपा और सुमन ने अपने नित्यप्रति के घरेलू कार्यों से कुछ समय निकाल बाजार से ऊन लेकर अपने ही घर में मिलकर राखियां बनाने का कार्य शुरु किया।अब वे समूह के माध्यम से ऊन से बनी राखियों को बाजार में लाने का मन बना रही है।जो महिलाओं की उन्नत सोच का परिणाम भी हैं। उन्हें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण उम्मीद हैं।कि ऊन निर्मित इन राखियों की बाजार में अच्छी धूम रहेगी।

