आइए कुर्मांचल अखबार के साथ स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पढ़ते हैं रतन सिंह किरमोलिया की स्वरचित कविता “आन बान शान तिरंगा”

आन बान शान तिरंगा….

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कई प्राणों के उत्सर्ग से हमने
पाया आजादी का उजियारा है।
तीन रंगों से समृद्ध तिरंगा
हमें प्राणों से भी प्यारा है।।
जय हिंद देश का नारा है
यह भारत देश हमारा है।
हमको प्राणों से प्यारा है
यह भारतवर्ष हमारा है।।
इसकी माटी में पले बढ़े हम
पाया जीवन न्यारा है।
हम सबकी आंखों का तारा
यह भारत राष्ट्र हमारा है।।
सीमा पर डटें सैनिक बनकर
हमने इस पर सबकुछ वारा है।
अहर्निश सेवा में रहें समर्पित
इसकी रक्षा लक्ष्य हमारा है।।
कुत्सित दृष्टि डाले जो इस पर
उसे मौत के घाट उतारा है।
अस्मिता आन बान शान इसकी
बचाए रखना ध्येय हमारा है।।
हम सबकी शान तिरंगा अमर रहे
बस यही कर्तव्य हमारा है।
घर घर फहरे यह तिरंगा
आन बान शान हमारा है।।
इसकी शान न जाने पावे
बस प्रण यही हमारा है।
आजादी अमर रहे देश की
आन बान शान तिरंगा हमारा है।।

 रतनसिंह किरमोलिया

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