आइए कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ते हैं राकेश उप्रेती की स्वरचित कविता

” जंतर मंतर ही नहीं देश का हर एक युवा आज पूछ रहा हैं “

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हाँ मैं शिक्षित हूँ इसलिए मुझ पर लाठी बरस रही है
जुर्म इतना कि मैंने आवाज़ उठाई है
इसलिए आज मेरे हाथ में किताबे नहीं जख्म है
मेरे भविष्य को मेरे सपनो को इतनी आसानी से ख़त्म किया जा रहा है
आज इतनी चोंटो के बाद भी में खड़ा हूँ शरीर पर चोट है
लेकिन आवाज में फिर भी जान है
क्योंकि चिंता है मुझे हम सब की
मैं पूछता हूँ देश का नागरिक होने के नाते
क्या मिल रहा है तुमको पेपर लीक कराके ?
क्या मिल रहा है हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ करके ?
क्या मिल रहा है ये लाठी चार्ज करके
क्या ये सही है ?
हम रात – रात भर जगे हैं
मेहनत की है संघर्ष किया है हमने
तुम क्या समझोगे इस सब को
और अंत में हमारी मेहनत, संघर्ष को यू आसानी से ख़त्म किया जा रहा है
ज़रा सोचो उस बेरोज़गार युवा के बारे में पेपर लीक की खबर सुन कर
क्या वो दूटेगा नहीं ?
क्या वही सपने फिर देख पाएगा वो ?
उस पिता की मेहनत को देखो
जिसने दिन रात एक करके उसका फॉर्म भरवाया था
जरा सोचो उस माँ के बारे में जिसने हर बार उसे उस सपनको पूरा करने का साहस दिया था
उन भाई बहिन को देखो जिनके साथ में उसने सपना देखा था
तुम्हारा क्या ??
कुछ भी तो नहीं
तुमनें पेपर लीक कराया
सारे सपनों को तोड़ दिया
उसे बिल्कुल अकेला छोड़ दिया
सपना टूटा तो वो खुद टूट गया
इतनी साल की मेहनत एक दम से ख़त्म कर दी तुमने
मैं पूछता हूँ आपसे
क्या गलती थी उस युवा की ??
बस इतनी की पढ़ाई कर ली थी उसने ??
या सपना देख लिया था उसने
इतनी पढ़ाई की उसने की अपने हक की लड़ाई के लिए वो जंतर -मंतर आ गया
इसलिए उस पर डंडे बरसाए गए ??
20 जुलाई 2026 को क्या हुआ था वहां ??
हम सब तो सवाल पूछने गए थे ना जवाब में क्या मिला
तुम्हारी लाठी-डंडे ??
वहाँ के डंडे मिले , वहाँ जूते चले
छात्रों के कपड़े फाड़े गए
उन पर डंडे बरसाए गए
उनका खून बहाया गया
बहनों के साथ बदतमीजी हुई
भाईयों को घसीट – घसीट कर मारा गया
जो भूख हड़ताल पर थे
उनका पानी तक भी छीन लिया गया
मैं पूछता हूँ आपसे ??
ये कौन सा लोकतंत्र है सिस्टम ??
ये कौन सा संवाद है ?
क्या हमारे सवालो का जवाब
मारपीट था
तुम सवालो को सुन भी सकते थे
आसानी से जवाब दे भी सकते थे
तो क्यों की ये मारपीट ??
क्यों सड़को पर खून बहवाया ??
आज NEET का पेपर लीक , SSC का पेपर लीक
हर एक भर्ती में धांधली
फिर तुम्हीं पूछते हो बिरोजगारी क्यों है ??
अगर हमारा भविष्य बेच दोगे तो रोजगार कहाँ से आएगा ??
हाँ मैंने ये Exam नही दिया है
तो क्या हुआ ?
बाकी सब भी मेरे भाई हैं , मेरी बहनें हैं
उन्होंने तो दिया है ना ??
आज उन पर लाठी चली कल हम पर चलेगी
इसलिए ये लड़ाई मेरी खुद की भी है
मुझे ये समझ नही आता आखिर ये सब सिस्टम किसके लिए कर रहा है ??
इन मासूम छात्रों के सपनों को क्यों तोड़ रही है ?
आज नेता खुश,माफिया खुश
और देश का भविष्य सड़कों पर
कहीं पंखों पर तो कही आत्महत्या कर बेहोश
आज मैं देखू तो अधिकतर मीडिया में भी ये ख़बर नहीं है
शायद उन्हें ये सब नहीं दिखता विदेश की ख़बरे आज 2 घण्टे तक चलती है
अपने देश का युवा खून से लथपथ है 30 सेकंड की खबर भी नहीं है कहीं
मैं पूछता हूँ इस सिस्टम से
मैं पूछता हूँ मीडिया से
उन बच्चों का क्या कसूर था ??
यही कि उन्होंने देश के लिए अफसर बनने का सपना देखा था ??
उन बहनों का क्या कसूर था ??
जो रात भर पढ़कर सुबह तुम्हारे डंडे खा रही थी ??
जंतर मंतर ही नहीं ये दुनिया गवाह है
दिल्ली की ये दीवारें गवाह हैं
ये आवाज़ बिल्कुल दबेगी नहीं
जब तक हमें सुना नहीं जाएगा कोई रुकेगा नहीं
हम भले थक जाएंगे,पर हारेंगे नहीं
हम गिर जाएंगे , पर झुकेंगे नहीं
क्योंकि ये लड़ाई नौकरी की नहीं देश के भविष्य की है !!

राकेश उप्रेती
अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

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