“अल्मोड़ा से विश्व तक गूंजेगा योग का संदेश” स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर अल्मोड़ा योगा एंड वैलनेस स्टूडियो का भव्य शुभारंभ

देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी अल्मोड़ा ने शनिवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया। स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के पावन अवसर पर अल्मोड़ा योगा एंड वैलनेस स्टूडियो का भव्य शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्ज्वलन, फीता कटिंग और कल्याण मंत्र के साथ संपन्न यह समारोह केवल एक संस्थान के उद्घाटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अल्मोड़ा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय योग एवं वैलनेस मानचित्र पर स्थापित करने के संकल्प का उद्घोष बन गया।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारत की प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी , विशिष्ट अतिथि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कोच श्री तथा योगाचार्य डॉ. उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का माल्यार्पण, अंगवस्त्र, स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान भेंट कर अभिनंदन किया गया।

“अल्मोड़ा की पहचान अब विश्व तक पहुँचेगी”

संस्थान के संस्थापक डॉ. गिरीश सिंह अधिकारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह स्टूडियो केवल योग सीखने का स्थान नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ने अल्मोड़ा की आध्यात्मिक शक्ति को विश्व के सामने रखा, उसी प्रेरणा से यह संस्थान स्थापित किया गया है।

उन्होंने कहा—

“हमारा लक्ष्य केवल योग कक्षाएँ चलाना नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि जब भी विश्व में योग, ध्यान, आध्यात्मिकता और वैलनेस की चर्चा हो, तो अल्मोड़ा का नाम सम्मान के साथ लिया जाए। आने वाले वर्षों में देश-विदेश से लोग यहाँ योग सीखने, ध्यान करने और हिमालय की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने आएँ—यही हमारा संकल्प है।”

उन्होंने आगे कहा कि यह स्टूडियो युवाओं, खिलाड़ियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा बच्चों के लिए समर्पित रहेगा और स्वास्थ्य के साथ-साथ भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों का भी प्रसार करेगा।

“योग ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है” — एकता बिष्ट

मुख्य अतिथि ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित और सफल बनाने की कला है।

उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नियमित योग और ध्यान से एकाग्रता बढ़ती है, स्मरण शक्ति विकसित होती है और कठिन से कठिन लक्ष्य भी सरल लगने लगते हैं।

खिलाड़ियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए केवल शारीरिक क्षमता पर्याप्त नहीं होती; मानसिक दृढ़ता, धैर्य और आत्मविश्वास भी उतने ही आवश्यक हैं, और यह सब योग से प्राप्त होता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि यदि वे प्रतिदिन योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें तो वे पढ़ाई, खेल, प्रतियोगी परीक्षाओं और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

“ध्यान मन का नव-निर्माण करता है” — लियाकत अली खान

विशिष्ट अतिथि श्री ने कहा कि आधुनिक जीवन और खेल दोनों में मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में योग, ध्यान और प्राणायाम व्यक्ति के भीतर नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

उन्होंने कहा कि आसन शरीर को मजबूत बनाते हैं, जबकि ध्यान मन को शांत, स्थिर और रचनात्मक बनाता है। योग केवल खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि हर विद्यार्थी, अधिकारी, शिक्षक और सामान्य नागरिक के लिए आवश्यक है।

“अष्टांग योग मोक्ष की ओर ले जाने वाला मार्ग है” — डॉ. महेंद्र मेहरा

डॉ. ने अपने व्याख्यान में महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग को मानव जीवन का पूर्ण विज्ञान बताते हुए कहा कि यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के माध्यम से व्यक्ति आत्मोन्नति एवं मोक्ष की दिशा में अग्रसर होता है।

उन्होंने में वर्णित ज्ञान योग, कर्म योग और भक्ति योग की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इन तीनों मार्गों का समन्वय जीवन को संतुलित, सफल और आध्यात्मिक बनाता है।

नगर के गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति

समारोह में उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, अल्मोड़ा शाखा के प्रबंधक, होटल अल्मोड़ा इन के प्रबंधक एवं उद्यमी, निरंकारी मिशन, अल्मोड़ा संगठन के प्रतिनिधि, श्री खीम सिंह रैकुनी, श्री गोविंद गुरुंग, योगासन भारत के जिला अध्यक्ष श्री जसोत सिंह बिष्ट, पतंजलि जिला प्रभारी श्री रूप सिंह बिष्ट सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त श्रीमती बसंती गैड़ा, कमल गुप्ता, प्रीता शाह, अंजलि गुप्ता, गोविंदा मटेला, तरुण शर्मा, वंदना वर्मा, हेमा वैष्णव, भारती कनौजिया, वीना जोशी, दीपा अधिकारी, आरती गुप्ता, हेमा मटेला, अनीता गुप्ता, ज्योति गुप्ता, भूपेंद्र सिंह वाल्दिया, किरण वर्मा, दीप्ति शाह, आरती अग्रवाल, लीला चौहान, मीना जोशी, मीना सहगल, अनीता कनौजिया, दीपक सिंह रावत, आयुष भट्ट, आदित्य बिष्ट, कमलेश पाठक, सौरभ चम्याल, योगेश पाल, प्रवल सुयाल, अजय सिराड़ी, हर्षिता नेगी, अनुराधा धामी, मोहिता पंत, हेमलता बिष्ट, नीतू, सूरज सिंह बिष्ट, बबीता कांडपाल, नेहा आर्या, गीतांजलि सिजवाली, कविता खानी, संगीता खानी सहित बड़ी संख्या में योग प्रेमी एवं नगरवासी उपस्थित रहे।

समापन

कार्यक्रम का समापन सामूहिक ॐ उच्चारण एवं कल्याण मंत्र के साथ हुआ। अंत में सभी अतिथियों ने इस पहल को अल्मोड़ा के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि अल्मोड़ा योगा एंड वैलनेस स्टूडियो भविष्य में उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में योग, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक चेतना का एक प्रतिष्ठित केंद्र बनेगा।

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