
खतों में उगायी जा रही फसलों को पक्षियों व पशुओं द्वारा पहुँचाये जा रहे नुकसान से बचाने के लिए बाजारों व रास्तों में बिखरे विभिन्न खाद्य सामग्रियों कुरकुरे,ओ एस, टकाटक चटपटा मशाला,चाचा चौधरी,चैक इट,रौकिट जीरा पापड़, लैसी फास्ट फूड़, मोटू-पतलू, आलू भुजिया, लैसी वैज बिरयानी,ब्यूटी पार्लर,रौकिट पौपी पास्ता,फन रिंग, भूत आया, मोटे चाचा,कचरी,पटैटो चिप्स,सतमोला, नट क्रैकर्स,पंजाबी तड़का,सतमोला मून कटोरी आदि विभिन्न खाद्य पदार्थों के रैपर्स जो कि एक अजैविक कचरे के रुप में हमारे सामने होता है। उत्तराखंड के विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि उपज को सबसे ज्यादा नुकसान जंगली पशु- पक्षियों
सुअर,लंगूर,बंदर,काकड़,हिरन, खरगोश,सेही, मोर,तोता आदि से हो रहा है। जिससे लोगों का ध्यान कृषि से हट गया है। जंगली जानवर गाँव घर की क्यारियों में बोये आलू,लहसुन, प्याज,टमाटर, हरी सब्जी, धनिया,अरबी आदि को नुकसान पहुँचा जाते हैं। अपनी कृषि व पर्यावरण को नुकसान पहुँचने के साथ ही हमारा परिवेश गंदा दिखायी देता है। इन रैपर्सों को जमीन के अंदर गाड़ा भी जाय तो ये हजारों वर्षों तक नष्ट नहीं होते। व जलाये जाने पर ये विषाक्त गैस छोड़ते हैं। जो कि मृदा, जल व वायु प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। अत: इन रैपर्सों को हम पुन: उपयोग व कबाड़ से जुगाड़ के माध्यम से अपने शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री के साथ – साथ छोटे बच्चों के खेलने के लिए गेंद व खिलौने बनाने,आग जलाने,शो पीस बनाने, विभिन्न फूलों व फलों के बीज बोने, आवश्यक कागजात रखने के लिफाफे आदि में कर सकते हैं। इससे हमारा पर्यावरण दूषित होने से भी बचा रहेगा व हमको इन रैपर्सों के रुप में मिल रहे अजैविक कचरे से भी बहुत हद तक राहत मिल सकती है। अपने पर्यावरण को स्वच्छ व हरा – भरा बनाये रखने के क्रम में कृपाल सिंह शीला (स.अ.- विज्ञान) रा.जू.हा.- मुनियाचौरा, क्षेत्र – भिकियासैंण (अल्मोड़़ा), उत्तराखंड पहले से ही बहुत से नवाचार करते आये हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में वे विगत कई वर्षों से हरियाली दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, माँ के नाम एक पेड़ जैसे वैश्विक व राष्ट्रीय कार्यक्रमों में वृक्षारोपण व वृक्षों का वितरण वन विभाग व अन्य संस्थानों के माध्यम से जनभागीदारी के साथ करते आये हैं। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) उत्तराखंड, देहरादून द्वारा कृपाल सिंह शीला को पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए “विज्ञान शिक्षा प्रसार सम्मान – 2025” माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री पुष्कर सिंह धामी जी के कर कमलों से सम्मानित किया गया है।


