आइये कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ें साहित्यकार एवं वरिष्ठ कवि प्रकाश चन्द्र पाण्डेय कनखल हरिद्वार द्वारा लिखी कुमांऊनी कविता

         आज - भोल 

जाण लागि रै यो पराणी,आंखों कैं खोल-खोल !
चाई छना त्यार दगड़ुवा, के न के त बोल-बोल !!
ठ्याक डकोइ हरै गिना,नाइ-पसेरि है गईं गोल !
गोरुनाका ग्वैंठ हराणा,हराणा घिनौड़ी घोल!!
न्यातों की मति मारिणी,खोलणईं आपणी पोल!
गाड़ भिड़ां खेति हराणि,फुलि रौछ खूब बकौल!!
कामाक बखत नीन ऐजैं,बुलाणा तौ तितै बोल!
मैंसा का चिमोड़ि गलाड़, सैणी छैं गोल-मटोल!!
सूरज चंदा अगासी तार,बतूनी उं बखतक मोल!
हातौक काम उभतै करौ,नि करो आज क भोल!!
मौसम जसि हमरि ज्यान,चड़ंग घाम कभै स्योल!
गुलगुलो खाण हूं चैंछ , कांबै खानूं च्यूड़ उत्योल!!
धरम अधरम को पुछणौ,अज्याल छ सेठूंक चौल!
द्वि हाथ छाति में धराल, जनूंकैं आज धन-बौल!!
सूरज डुबं चन्द्रमा ओछां, तारन कणि पडं कल्टोल!

ऐलकि घड़ि यो छ हमरि ,कथां जाणौ ऊणि भोल!!

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