
रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)

गरुड़ (बागेश्वर) । पुराने समय में कम आबादी और रोजगार के लिए गांव से पलायन कर चुके युवाओं के बाद घरों के अधिकतर बन्द दरवाजों को देखते हुए सम्भवतः बुजुर्गों ने गांव का नाम ही द्वारढ़का रख दिया। जो वर्तमान तक इसी नाम से प्रचलित हो गया। गांव से पलायन कर चुके वे परिवार अब वापस आने शुरु हो गये हैं। नयी पीढ़ी के लोगों ने प्रचलित नाम को नकारात्मक सोच मानते हुए द्वारढ़का नाम बदलने की मुहिम शुरु की । जिसके लिए सभी परिवारों की सहमति ली गयी।सोमवार को पूजा पाठ, जनप्रतिनिधिओ की उपस्थिति में नाम परिवर्तन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के अलावा आसपास के गांवों के लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। अब देवकुंज बाखली के नाम से जाना जाएगा जिजोली गाँव का तोक, बताते चले कि गरुड़ विकासखंड के जिजोली गाँव के द्वारढका तोक में 10 परिवार निवास करते हैं। बेरोजगारी के चलते गाँव के लोग व्यवसाय हेतु दिल्ली मुम्बई आदि महानगरों में चले गए थे। अब लॉकडाउन के बाद युवाओं ने रिवर्स पलायन किया और क्षेत्र में ही स्वरोजगार कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है। ग्रामीण गोविंद जोशी ने बताया कि द्वारढका नाम नकारात्मक व उदासी का संदेश देता था। युवाओं ने तय किया कि बदलते समय हालतों के साथ नाम बदलना चाहिए। श्यामखेत आश्रम के स्वामी शंकरानन्द गिरी महाराज द्वारा ग्रामीणों को देवकुंज बाखली रखने का सुझाव दिया गया जिसपर ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से देवकुंज बाखली नाम रखा गया है। पूजा पाठ पंडित चन्द्रशेखर कांडपाल द्वारा सम्पन्न कराई गई। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डीके जोशी,ग्राम प्रधान जिजोली कलावती देवी,क्षेत्र पंचायत सदस्य , ऋतुराज जोशी, भवानी देवी जोशी,दिनेश भट्ट,प्रकाश भट्ट,दीप भट्ट,दुर्गा देवी,भोला दत्त पांडे,आनंद सिंह दोसाद आदि मौजूद थे।




