“मिट्टी में छुपा है स्वास्थ्य का विज्ञान” — योग विज्ञान विभाग में गूंजा प्राकृतिक चिकित्सा का संदेश…..कार्यशाला बनी अनुभव और उपचार का संगम

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार एवं राज्य स्वच्छ गंगा मिशन (नमामि गंगे), उत्तराखण्ड के संयुक्त तत्वावधान में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग में आयोजित तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं वैकल्पिक चिकित्सा कार्यशाला का तृतीय दिवस अत्यंत प्रभावशाली और प्रेरणादायक रहा।
योग विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन चंद भट्ट के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में आयोजित प्रथम सत्र में उन्होंने अपने वैज्ञानिक एवं प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि मिट्टी चिकित्सा केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक प्रमाणित प्राकृतिक विज्ञान है, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर स्वास्थ्य संतुलन स्थापित करती है। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के माध्यम से मिट्टी के चिकित्सकीय महत्व को स्पष्ट किया।
तदुपरांत योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गिरीश अधिकारी ने मिट्टी चिकित्सा के इतिहास, इसके माध्यम से विभिन्न रोगों के निवारण तथा शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर होने वाले उपचारों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
द्वितीय सत्र अनुभव से उपचार की ओर
द्वितीय सत्र में डॉ. गिरीश अधिकारी ने प्रतिभागियों को मिट्टी चिकित्सा की व्यावहारिक विधियों से अवगत कराया।
इस दौरान पेट, रीढ़ एवं छाती की मिट्टी पट्टियों का प्रयोगात्मक अभ्यास कराया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने स्वयं अनुभव करते हुए इसके लाभ को महसूस किया।
कई साधकों ने तत्काल राहत का अनुभव साझा किया, जिससे यह सत्र अत्यंत जीवंत और प्रभावशाली बन गया।
तृतीय सत्र: सरल तकनीक, प्रभावी परिणाम
तृतीय सत्र में डॉ. अधिकारी द्वारा सिर, कान एवं आंखों की गीली मिट्टी के लाइव प्रदर्शन के माध्यम से उपचार की सरल और प्रभावी विधियों को सिखाया गया।
उन्होंने बताया कि ये तकनीकें न केवल शारीरिक रोगों में, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने में भी अत्यंत सहायक हैं।
अन्य वक्ताओं के विचार
श्रीमती हेमलता अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा केवल उपचार की विधि नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली का आधार है, जिसे अपनाकर व्यक्ति दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकता है।
लल्लन कुमार सिंह ने कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित कर ही सच्चे स्वास्थ्य की प्राप्ति संभव है, और मिट्टी चिकित्सा जैसी पद्धतियां हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं।
छात्र-छात्राओं का उत्साह — सफलता की पहचान
कार्यशाला में योग विज्ञान विभाग के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ सक्रिय सहभागिता निभाई।
पूजा बोरा, आशीष संतोलिया, नेहा आर्य, गीतांजलि, नीतू, हेमलता, हर्षिता नेगी, पंकज सिंह राठौर, ज्योति जीना, योगेश पाल, अर्चना, परवल सुयाल, कमलेश पाठक, अनुराधा धामी, आदित्य बिष्ट, मोहिता पंत, रिया जोशी, कमला फर्त्याल, ललिता, प्रकाश भट्ट, किरण बिष्ट, खुशी बिष्ट, यामिनी लसपाल, रितु बिष्ट, भावना बिष्ट, निकिता मेहरा, दिव्य रावत, योगिता पंत, मीनाक्षी नेगी, तनुजा पंत सहित अनेक विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी इस कार्यशाला की सफलता का प्रमुख आधार रही।
समापन संदेश
कार्यशाला के समापन अवसर पर यह स्पष्ट हुआ कि यदि सही मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिले, तो मिट्टी चिकित्सा केवल एक वैकल्पिक पद्धति नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य का सशक्त आधार बन सकती है।
डॉ. नवीन भट्ट के कुशल नेतृत्व और डॉ. गिरीश अधिकारी के व्यावहारिक प्रशिक्षण ने इस कार्यशाला को ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा का उत्कृष्ट संगम बना दिया, जिसने प्रतिभागियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित किया।

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