

रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)
गरुड़ (बागेश्वर) । उत्तरमुखी बुरसौल गंगा के तट पर बसा तुर्रेश्वर महादेव मंदिर जो कि एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का धार्मिक आस्था का प्रतीक है। स्थानीय जनता के धार्मिक आस्था के प्रतीक इस मंदिर में ग्रामीणों के सहयोग से ही भैरव नाथ , गणेश जी,एवं इस बार बजरंगबली की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया हैं। भेटा गांव निवासी बसन्त बल्लभ लोहुमी द्वारा एक लाख तिरसठ हजार रुपए की लागत से बने बजरंगबली की मूर्ति मंदिर में स्थापित किये जाने को दी गयी हैं।
मंगलवार को मूर्ति को स्नान मंत्रोच्चारणों के बीच प्राण प्रतिष्ठा की गयी। पुरोहित परिवार से सतीश चन्द्र लोहुमी,कैलाश लोहुमी, दिनेश लोहुमी,दीप चन्द्र लोहुमी के द्वारा हवन यज्ञ सम्पन्न करवाया गया। विदित हो कि तुर्रेश्वर महादेव मंदिर में सावन के मांहभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता हैं। सामाजिक कार्यकर्ता देवकी नंदन जोशी ने प्रत्येक माह के हर शनिवार को मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ किया जाता हैं। जिसमें स्थानीय जनता एवं श्रद्धालुओं की बढ़चढ़ कर भागीदारी सुनिश्चित की जाती हैं। शिवार्चन, रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रमों को मंत्रोच्चारणों के बीच संपादित किया जाता हैं। नवग्रहों की शान्ति के लिए पंडितों द्वारा यजमानों से शिव जलाभिषेक व हवन यज्ञ आदि कर महादेव से यजमानों के घरों में सुख-शांति की कामना की जाती हैं। श्रद्धालुओं द्वारा वर्ष में दो तीन बार ऊं नमः शिवाय का दो-तीन दिवसीय जप आयोजित किया जाता हैं। समापन पर बृहद भण्डारे का आयोजन किया जाता हैं। जिसमें सैकड़ों की तादात में श्रद्धालुओं द्वारा प्रसाद ग्रहण किया जाता हैं।
गौरतलब हैं कि भेटा गांव निवासी नन्दा बल्लभ लोहुमी एवं चन्द्र शेखर लोहुमी द्वारा तुर्रेश्वर महादेव मंदिर को अपनी जमीन दी गयी हैं। इस मंदिर के सौन्दर्यकरण, धर्मशाला,चारदीवारी, दीवालों के लिए विधायक निधि, सांसद निधि तथा ग्राम पंचायत के रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य किये गये हैं। मंदिर के पास पंकज लोहुमी पुत्र राजेन्द्र प्रसाद द्वारा दो शौचालयों का निर्माण किया हैं। रमेश चन्द्र जोशी कान्हा द्वारा बजरंगबली मंदिर में ग्यारह किलो की घण्टी चढ़ाई गयी हैं। स्थानीय जनता के सहयोग से शिव मंदिर के पास भैरव मंदिर व मूर्ति की स्थापना जन सहयोग से तथा अमोली निवासी पुष्पा जोशी सेवानिवृत्त शिक्षिका ने गणेश जी की प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया हैं। मंदिर में कपिलेश्वर निवासी किशन गिरि पहले पुजारी,उनके बाद उनका पुत्र केदार गिरि वर्तमान में उनका पुत्र नन्दन गिरि पुजारी का कार्य करते हैं।

