
93 वर्षीय सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ0 जयदत्त उप्रेती एवं उनकी सहधर्मिणी गुरुमाता ने अपने निवास स्थान 'स्वस्त्ययन' तल्ला खोल्टा, अल्मोड़ा में डॉ0 धाराबल्लभ पांडेय की योग पर प्रकाशित पुस्तकें 'योग के प्रवर्तक महर्षि एवं योगाचार्य' तथा दूसरी पुस्तक ' पतंजलि के अष्टांग योग का समीक्षात्मक अध्ययन' इन दोनों ग्रंथों का शुभ आशीर्वाद देकर लोकार्पण किया। योग पर लिखी इन दोनों पुस्तकों को उप्रेती ने बहुत उपयोगी और प्रशंसनीय कार्य बताया। उन्होंने कहा कि योग पर इतनी विस्तृत विषय वस्तु पर लिखी पुस्तकें सभी योगनिष्ठ पाठकों, छात्रों शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं विद्वज्जनों के लिए अत्यंत उपयोगी होंगी। मैं डॉ0 पांडेय के इस परिश्रम की सराहना करता हूँ और उन्हें आशीर्वाद देता हूँ कि उनकी लेखनी इसी तरह से आगे बढ़ती रहे।
डॉ. पांडेय ने बताया कि उनके द्वारा लिखी गई यह दोनों पुस्तकें अपने शोध कार्य के परिप्रेक्ष्य में प्रकाशित की गई है। दोनों पुस्तकों की भूमिका प्रोफेसर डॉक्टर जयदत्त उप्रेती के द्वारा ही लिखी गई है। डॉ. पांडेय का कहना है कि यह पुस्तक शोध कार्य की सीमित विषय वस्तु से हटकर योग पर विस्तृत एवं संशोधित स्वरूप के साथ प्रकाशित की गई हैं। उनका कहना है की शोध कार्य की प्रेरणा और मार्ग निर्देशन परम पूज्य आदरणीय प्रोफेसर डॉ0 जयदत्त उप्रेती जी की असीम अनुकंपा से ही सफल हो पाया। यद्यपि डॉ० पांडेय ने अपना शोध कार्य तात्कालिक संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ0 हरिनारायण दीक्षित, डीएसबी परिसर संघटक महाविद्यालय, कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल के निर्देशन में उनके सानिध्य में रहकर पूर्ण किया परंतु कार्य को पूर्ण करने में दोनों का ही वरदहस्त शिरोधार्य रहा। शोध कार्य पर आधारित इन दोनों पुस्तकों का प्रकाशन करने पर यद्यपि आज मेरे निर्देशक प्रोफेसर डॉ0 हरिनारायण दीक्षित जी अब इस दुनिया में नहीं रहे किंतु उनकी कृपा दृष्टि, उनका प्रेम और सूक्ष्म उपस्थिति आज भी मैं अपने जीवन में अनुभव करता हूँ।
डॉक्टर पांडेय ने बताया कि उन्होंने 1995 में पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर ली थी परंतु इस कार्य को अपरिहार्य कारणों से अब तक प्रकाशित नहीं कर पाया था। किंतु इसके विभिन्न अंश विभिन्न पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते रहे हैं । जो विषय शोध कार्य में छोड़ दिए थे अथवा संक्षिप्त कर दिए गए थे अब उन सबको सम्मिलित कर विस्तार से पुस्तकों में लाने का प्रयास कर पूर्ण किया गया है।
यह दोनों पुस्तकें योग के क्षेत्र में विस्तार से जानकारी प्राप्त करने के प्रयास से पूर्ण की गई है। डॉ0 पांडेय की अब तक लगभग 24 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। डॉ. पांडेय स्वयं भी सेवानिवृत अध्यापक है, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में 5 शैक्षिक पत्रिकाओं का भी संपादन किया तथा उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार व प्रतिभा सम्मान सहित विभिन्न पुरस्कार प्राप्त किये हैं और साहित्य लेखन में भी लगातार विभिन्न पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। अभी भी अपने साहित्य लेखन द्वारा समाज सेवा करने में सतत प्रयत्नशील है।