Uttarakhand- जेलों के बुरे हाल से फूटा हाईकोर्ट का क्रोध…….. जानिए क्या दिए गए निर्देश

बीते 8 दिसंबर 2021 बुधवार के दिन उत्तराखंड में हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों का निरीक्षण कर इस बारे में टिप्पणी की। वर्तमान में उत्तराखंड के जिलों की जो दुर्दशा हो रही है हाईकोर्ट ने उसे लेकर अपनी काफी नाराजगी व्यक्ति की कोर्ट का कहना है, कि क्या अधिकारी अपने बच्चों को 24 घंटे इस हालात में रख सकते हैं। उनका कहना है कि 21वीं सदी में हो कर भी उत्तराखंड की जेलों का हाल सदियों पुराने जैसा है। यहां कैदियों को जानवरों की तरह भरा जाता है और बाथरूम में खाना बन रहा है। मुख्य न्यायधीश आर एस चौहान, व न्यायमूर्ति एनएस धानिक ने उत्तराखंड की जेलों को देखते हुए चेरापल्ली तेलंगाना की जेल का उदाहरण देते हुए कहा कि चेरापल्ली तेलंगाना की जेल सभी सुविधाओं से लैस है तथा वहां पर कैदियों के लिए भी सारी सुविधाएं हैं।


तथा उन्होंने छोटे अपराधियों को पैरोल पर नहीं छोड़ने पर भी नाराजगी जताई तथा उन्होंने कहा है कि जिन कैदियों की सजा आधी से ज्यादा पूरी हो चुकी है व जिनका व्यवहार अच्छा है उन्हें भी पैरोल पर छोड़ा जाना चाहिए। दरअसल हाईकोर्ट ने यह सुनवाई जेलों में सीसीटीवी कैमरे व अन्य सुविधाएं न होने को लेकर दायर जनहित याचिका के आधार पर की। हाई कोर्ट की इस सुनवाई में गृह सचिव रंजीत सिन्हा, जेल महानिदेशक पुष्कर ज्योति, उपस्थित हुए। हाईकोर्ट द्वारा सरकार को निर्देश देकर दिए गए सुझाव पर कमेटी बिठाकर अमल करने को कहा गया। तथा कमेटी की रिपोर्ट महीने के हर तीसरे सप्ताह में पेश करने की अपील की गई।


पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा गृह सचिव और जेल महानिदेशक को सभी जेलों का दौरा करके रिपोर्ट व फोटोग्राफ पेश करने के निर्देश दिए गए थे। तथा बीते 8 दिसंबर 2021 बुधवार के दिन उन्होंने शपथपत्र कोर्ट में पेश किया जिसके बाद फोटोग्राफ व रिपोर्ट देखने पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की रिपोर्ट में राज्य के सभी जिलों का ब्यौरा था। जिसके अनुसार राज्य की जेलों का हाल जानवरों के गौशालाओं से भी ज्यादा बत्तर पाया गया राज्य की सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को भरा गया है। जिसका विवरण निम्नलिखित है।
जेल। क्षमता कैदी
हरिद्वार 870 1400
रुड़की 200 625
देहरादून 518 1491
हल्द्वानी 535 1736
नैनीताल 70 174
अल्मोड़ा 102 325


तथा इसी तरीके का हाल राज्य के बाकी जिलों का भी है, जहां कैदियों के लिए खाना बाथरूम में बनता है और नैनीताल जेल में तो बिना बैरक के भी कैदी रहते हैं। इन सब को लेकर हाईकोर्ट द्वारा सरकार को दिशा निर्देश दिए गए हैं, कि इस मामले में नई जेलों के लिए बजट पास करें व नई जेलों का निर्माण कार्य किया जाए तथा कैदियों के लिए साफ-सुथरे किचन, बाथरूम आदि की व्यवस्था भी की जानी चाहिए। तथा कैदियों के रोजगार की व्यवस्था के लिए फैक्ट्रियां, बच्चों के लिए स्कूल, डॉक्टर आदि की व्यवस्था के लिए बजट तैयार होना चाहिए।