
उत्तराखंड राज्य में सबसे ज्यादा खतरे की जद में आने वाली झीलो में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जाएंगे। बता दें कि देश के हिमालयी राज्यों में 188 हिमनद झीले हैं जो कि खतरे में है जिनमें से उत्तराखंड में 13 झीले हैं और फैक्टर पर इन 13 झीलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा गया है। गृह मंत्रालय ने झीलो के खतरे को देखते हुए इनका ट्रीटमेंट करने के निर्देश देते हुए वैज्ञानिकों की टीमों का गठन कर दिया है।
आपदा प्रबंधन डिवीजन ने हिमालय राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ झीलों के विस्फोट से आने वाली बाढ़ नियंत्रण पर वर्चुअल बैठक की और बैठक में राज्य की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी और सचिव आपदा प्रबंधन डॉक्टर रंजीत कुमार सिन्हा भी शामिल रहे। खतरे की जद में उत्तराखंड की 13 झीले हैं इन 13 झीलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा गया है तथा अति संवेदनशील श्रेणी यानी कि ए श्रेणी में चमोली की एक और पिथौरागढ़ की चार झीलों को शामिल किया गया है इसलिए इनके संरक्षण के लिए टीमों का गठन किया जाएगा और अधिक खतरे की जद में आने वाली झीलो में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया जाएगा।

