
उत्तराखंड राज्य में
अस्पतालों के बिलों में बहुत बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को उपचार मिलता है मगर उनके बिलों में गड़बड़ी सामने आई है। हालांकि सरकारी खजाने से भुगतान होने से पहले ही अस्पतालों का यह कारनामा सामने आ गया और स्वास्थ्य प्राधिकरण के ऑडिट में निजी अस्पतालों की पोल खुल चुकी है। प्राधिकरण द्वारा पिछले 4 सालों में ऐसे अस्पतालों के 115 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि के बिल निरस्त कर दिए गए हैं और यह कुल दावो का 11% है। यही नहीं बल्कि ऐसे फर्जीवाड़ा करने वाले 29 अस्पतालों की योजना से संबद्धता भी निरस्त की जा चुकी है। उत्तराखंड राज्य में प्राधिकरण की व्यवस्था है इसीलिए अभी तक आयुष्मान योजना में एक भी रुपए का गलत भुगतान नहीं हुआ है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य को फ्रॉड प्रीवेंशन एंड ऑडिट वर्ग में आयुष्मान उत्कृष्टता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। भविष्य में आयुष्मान योजना के तहत भुगतान में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए 2 माह पहले अस्पतालों के बिलों के भुगतान की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जा चुका है और इसमें अब उपचार कराने वाले मरीज से पुष्टि कराने के बाद ही अस्पतालों को भुगतान किया जा रहा है।

