1 सप्ताह में UNSC की तीसरी आपात बैठक, प्रस्तावित मसौदे के रास्ते को रूस ने वीटो पावर से रोका

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध पर सैनिक कार्रवाई को लेकर असहमति वाले विवाद पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने स्थानीय समयानुसार वोटिंग की गई| इस वोटिंग की प्रक्रिया में भारत और चीन ने खुद को दूर रखा| बताते चलें कि इस प्रस्ताव में रूस की आक्रामकता की निंदा के साथ यूक्रेन से तत्काल और बिना शर्त रूसी सेना की वापसी की भी बात कही है| अमेरिका और अल्बानिया द्वारा पेश किए गए मसौदा प्रस्ताव में रूस की आक्रामकता, हमला और यूक्रेन की संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा शामिल है| इसके अतिरिक्त प्रस्ताव में यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर प्रतिबद्धता जताई गई है और रूसी हमले को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा का उल्लंघन बताया गया| पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्सक और लुहांस्क को अलग मान्यता देने के फैसले को भी तुरंत पलटाने का आवाहन मसौदे में किया गया| मसौदा प्रस्ताव में यह कहा गया है कि यूक्रेन में जरूरतमंद लोगों की मानवीय सहायता की तीव्र माननीय कर्मियों और बच्चों सहित कमजोर परिस्थितियों में व्यक्तित्व की रक्षा के लिए सुरक्षित और निर्वात पहुंच की अनुमति दे| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य देशों में से 11 देशों ने यूक्रेन में रूस की कार्यवाही की निंदा वाले प्रस्ताव पर वोट डाला जबकि भारत चीन और यूएई ने इस से दूरी बना ली लेकिन रूस के वीटो पावर से इस प्रस्ताव का रास्ता ही रोक दिया है| बता दें कि रूस सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है और इसी नाते उसके पास वीटो पावर का अधिकार है| जिसके तहत रूस ने वीटो पावर का प्रयोग करके प्रस्ताव का रास्ता रोक दिया है| आज लगातार 1 सप्ताह के भीतर तीसरी बार आयोजित की गई सुरक्षा परिषद की तीसरी बैठक में यूक्रेन में की गई रूसी सैनिक कार्रवाई के विरोध में प्रस्ताव पेश किया गया है| जिस पर सदस्य देशों ने वोटिंग की लेकिन भारत और चीन ने खुद को इससे दूर रखा वहीं रूस ने वीटो पावर का प्रयोग करते हुए इस प्रस्ताव की राह को रोक दिया है|