“द कश्मीर फाइल्स” ने कश्मीरी मुस्लिमों को उनकी गलती मानने पर किया मजबूर, जानिए क्या कहा कश्मीरी मुस्लिमों ने

विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित फिल्म “द कश्मीर फाइल्स” ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को इस तरह जनता के सामने रखा है जिससे कि ना सिर्फ देश के और हिस्सों की जनता बल्कि खुद कश्मीर में रह रहे मुस्लिमों ने भी इस फिल्म को देखने के बाद अपनी तथा अपने वालिदो की गलती को स्वीकार किया है। कश्मीरी मुस्लिम अब हिंदुओं के विस्थापन को अपनी हार और नाकामी बता रहे हैं और मान रहे हैं कि उस समय उन्होंने अपने हिंदू पड़ोसियों को कश्मीर में नहीं रोका। कश्मीरी मुस्लिमों का कहना है कि यदि उस समय कश्मीरी पंडितों का विस्थापन रोक देते तो आज द कश्मीर फाइल नहीं बनती और अगर यह फिल्म बनती तो भी कश्मीरी मुस्लिम समाज इसमें एक खलनायक का चेहरा नजर नहीं आता।और चारों तरफ कब्रिस्तान में कश्मीरी नौजवानों की लाशों के ढेर नजर नहीं आते। कश्मीरी मुस्लिमों ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए अब उसे सुधारने की बात कही है। दरअसल फिल्म द कश्मीर फाइल्स को अभी तक कश्मीर के सिनेमाघरों में नहीं दिखाया गया है मगर फिर भी लोगों ने और माध्यमों से और जम्मू जाकर यह फिल्म देखी और इसे देखने के बाद कई मुसलमानों ने कश्मीरी पंडितों का विस्थापन अपनी नाकामी बताई। इस संबंध में पीपल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के महासचिव और लेखक जावेद बेग का इस संबंध में कहना है कि 21 मार्च 1997 को उनके घर की थोड़ी दूरी पर सात कश्मीरी हिंदुओं को उनके घर से बाहर निकाल कर उनका कत्ल किया गया लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की ऐसी एक नहीं बल्कि कई घटनाएं हैं। उनका कहना है कि हमें तो कश्मीरी हिंदुओं से सामूहिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। तथा उनके साथ ही उदारवादी हुर्रियत से जुड़े एक वरिष्ठ अलगाववादी ने कहा कि हमें द कश्मीर फाइल से परेशान होने की नहीं बल्कि खुद के गिरेबान में झांकने की जरूरत है। इस तरह कई कश्मीरी मुस्लिमों ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को अपनी नाकामी बताकर माफी मांगी है।

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