
हल्द्वानी| राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में पीजी की कक्षाओं में प्रवेश के लिए अब छात्र-छात्राओं का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य नहीं होगा| कॉलेज प्रशासन ने विवाद के बाद मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्यता की शर्त को हटा लिया है| अब मेडिकल बोर्ड जरूरत पड़ने पर छात्र-छात्राओं का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण करेगा|
बताते चलें कि राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एमबीबीएस और पीजी कक्षाओं में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं का मेडिकल परीक्षण भी किया जाता था| यह परीक्षण मेडिकल बोर्ड करता था| अगर किसी छात्र-छात्रा को कोई बीमारी है तो इसका पता चल जाता था| मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि इसमें बीमार छात्र-छात्राओं का उपचार भी किया जाता है| कुछ समय पहले प्रवेश के समय मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण की शर्त भी जोड़ दी गई| इस पर कॉलेज प्रशासन का तर्क है कि छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था| जिससे पता चल सके कि कोई छात्र-छात्रा अवसाद, चिंता, भय आदि समस्याओं से ग्रसित तो नहीं है| यदि ऐसा है तो उसका उपचार किया जा सके| हालांकि इस परीक्षण का कॉलेज के प्रवेश पर कोई असर नहीं पड़ता| नियम लागू होते ही विरोध शुरू हो गया| यह भी बात उठने लगी कि इसका छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ सकता है| छात्र-छात्राओं के विरोध को देखते हुए प्रवेश के लिए होने वाले मेडिकल परीक्षण में से मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण की अनिवार्यता हटा दी गई है| अब मेडिकल बोर्ड केवल उसी छात्र या छात्रा का मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण करेगा जिसके लिए उसे जरूरत महसूस होगी| संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं|

