गरुड़ – ईश्वर दर्शन कर आवागमन के बंधन से मुक्त हो जाना ही मानव जीवन का उद्देश्य है – साध्वी मेरुदेवा भारत… शुरू हुई भागवत कथा

गरुड़। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में रामलीला मैदान गरुड़ में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा प्रारंभ हो गई है। कथा का शुभारंभ जिपंस जनार्दन लोहुमी, बबलू नेगी, भाष्कर बोरा, सभासद अंकित जोशी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कथा व्यास साध्वी सुश्री मेरुदेवा भारती ने आत्मदेव के प्रसंग को भक्तों के समक्ष रखते हुए कहा कि आत्मदेव ने सदैव ईश्वर से संतान की मांग की, संसार के सुख की मांग की, संतों के समझाने पर भी वह ईश्वर भक्ति की ओर नहीं बढ़े और परिवार व अपने ही पुत्र के द्वारा दुखी रहे, अशांत रहे। यदि आप सुख पाना चाहते हो, तो वह संसार में नहीं बल्कि ईश्वर की प्राप्ति में मिलेगा। जिसने भी ईश्वर से सुख की मांग की है वह दुखी ही रहा है। क्योंकि सुख में दुःख छुपा है। सुख का स्त्रोत मात्र वह ईश्वर ही है। जब मनुष्य ईश्वर की प्राप्ति कर लेता है तो वह दुःख में भी आनंद से रहता है। वह दुःख के पल में भी ईश्वर का अनुभव करता है इसलिए यदि यह जीवन मिला, यह मानव का तन मिला है तो इसे सार्थक कर लें। ईश्वर से ईश्वर की मांग करें। इस दौरान कैलाश चंद्र जोशी, जीवन दोसाद, जगदीश तिवारी, मोहन सिंह अल्मिया आदि मौजूद थे।

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