
गरुड़ (बागेश्वर )। होलाष्टक पर प्रसिद्ध कोट भ्रामरी मंदिर में भेटा गांव के होल्यारों ने अबीर गुलाल चढ़ाया। इसके साथ ही कत्यूर घाटी में खड़ी होली का रंगारंग आगाज हो गया है। भेटा गांव के होल्यार परंपरा को निभाते हुए होलाष्टक पर कोट भ्रामरी मंदिर पहुंचे। पूजा अर्चना कर यहां मां भ्रामरी को अबीर गुलाल और रंग चढ़ाया।इस मौके पर शांतिपूर्वक होली संपन्न होने की कामना की गई।
पौराणिक लोक परंपरा के अनुसार प्रतिवर्ष भेटा गांव के लोहुमी परिवारों द्वारा होलाष्टक के अवसर पर कत्यूर की कुल देवी मां भ्रामरी को अबीर गुलाल व रंग चढ़ाया जाता है। तभी से पूरी घाटी में खड़ी होली का विधिवत रंगारंग आगाज होता है। कत्यूर घाटी के इतिहास में भेटा गांव के लोहुमी परिवारों का विशेष महत्व है। मंगलवार को भेटा गांव की होली वरिष्ठ डांगर नंदाबल्लभ लोहुमी के नेतृत्व में कोट मंदिर पहुंची। होल्यारों ने मां को अबीर गुलाल व रंग चढ़ाया और चीर बंधन किया। इस मौके पर सिद्धि के दाता विघ्न विनाशन, कैले बांधी चीर हो रघुनंदन राजा तथा आज कन्हैया रंग भरे सहित कई होली गीत गाए गए। इस दौरान जिपंस जनार्दन लोहुमी, भाष्कर बोरा, पूर्व प्रधान कृपाल दत्त लोहुमी, बंशीधर लोहुमी, राजू लोहुमी, चंद्रशेखर लोहुमी, दीप चंद्र लोहुमी, सतीश लोहुमी, ललित लोहुमी, पवन लोहुमी, तारा लोहुमी, शेखरानंद लोहुमी, राजेंद्र लोहुमी, खजान लोहुमी, सिप्पी, वैभव, नीरज, योगेश, दिनेश लोहुमी, आनंद बल्लभ लोहुमी, प्रथम लोहुमी, अनिल लोहुमी, हरीश लोहुमी समेत दर्जनों होल्यार मौजूद थे।

