आइए कुर्मांचल अखबार के साथ पढ़ें साहित्यकार एवं कवि प्रकाश चन्द्र पाण्डेय की हिंदी कविता

प्रस्तुति – रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)

 *आकर मेरे गले पड़ी*

एक नवेली थी अलबेली ,आकर मेरे गले पड़ी,
धीरे – धीरे पैंग बढ़ाई, नैना उससे ऐसी लड़ी!
वो चुप थी मैं क्या कहता, ताप चढ़ रहा था तन में,
टाइफाइड नाम है उसका ,ऐसी विपदा आन पड़ी!!
एक नवेली थी अलबेली,आकर मेरे गले पड़ी,
होली बीती फाग भी गुजरा, रहा देखता खटिया से,
लोग खेल रहे आंगन में ,मैं रंग लगाता खटिया से।
इतनी जिंदगी गुज़र गई ,ऐसा मौका पहला था,
उठने को मन करता था , उठ ना
पाया खटिया से।।
होली बीती फाग भी गुजरा, देखता रहा खटिया से।।

प्रकाश चन्द्र पाण्डेय कनखल हरिद्वार

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