
“कैंची धाम का करिश्मा”

पूज्य बाबा जी
कुछ तो अलग
कुछ तो खास है ना आपके दरबार में
यूं ही आपको बाबा जी नहीं कहा जाता है
हर कोई कुछ ना कुछ आपसे जरूर पाता है
वैसे मैं बता दूं जब जिंदगी में तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा हो बार-बार तुम असफल हो रहे हो मन अब तुम्हारा कहीं ना लग रहा हो कोशिश करने के बाद भी तुम बार-बार असफल हो रहे हो
आगे कुछ समझ तुम्हें नहीं आ रहा हो तब तुम बिना कुछ सोचे समझे उत्तराखंड के पहाड़ों के बीच नैनीताल भवाली से थोड़ा सा आगे आकर हमारे बाबा जी से मिलना …
जैसे ही मिलोगे हमारे बाबा जी से तो तुम्हें लगेगा सब कुछ ठीक ही तो है मानो बाबा जी के आश्रम में आने से पहले ही बाबा जी ने तुम्हारी सारी समस्याएं सुन उन्हें दूर कर लिया हो
गेट के अंदर पहुंचते ही मंदिर की घंटी बजाते ही तुम्हें कुछ अलग सी अनुभूति होगी
तुम्हें यहां ना कोई मोह ना कोई माया होगी ना कोई तुम्हारी समस्या होगी ना कोई तुम्हारा दुःख होगा
होगा तो बहुत सारा सुकून
यहां पहुंचते ही लगेगा तुम्हें जैसे सब कुछ अपना सा तो है
यहां ना दुनिया का दिखावा होगा
ना यहां कोई ऊंचा ना नीचा होगा ना कोई जात ना पात होगी
ना यहाँ सोने का मुकुट होगा ना चाँदी की थाल होगी
होगा तो मेरे बाबा जी का आश्रम और उनके शरीर में एक कम्बल एक लंगोट और उनकी आँखों में करुणा और दया का भण्डार होगा
तुम जब देख लोगे उन्हें एक बार समझ जायेंगे वो पल में तुम्हारी सारी समस्याएँ
तुम्हारी आँखें बन्द करने से आँखें खुलने तक बाबा जी तुम्हारे जीवन की समस्याओं को दूर कर देंगे
वैसे मैंने सुना है यहां आते हैं बड़े-बड़े लोग जिनको पूरा जग जानता है
जैसे स्टीव जॉब्स आए यहाँ जब उन्हें कोई रास्ता नहीं दिख रहा था आगे कुछ नहीं सूझ रहा था
मार्क ज़करबर्ग भी पहुँचे यहाँ फेसबुक बनाने से पहले
वर्तमान में आप खुद ही देखो ना कितनी भीड़ कितनी आस्था की सैलाब है यहाँ
बड़े-बड़े पैसे वाले भी सबके बराबर ही भक्त कहलाते हैं यहाँ
यहाँ की शिप्रा नदी,देवदार के पेड़ आज भी गवाह हैं
कि कितनी सारी बंद कहानियों को बाबा जी ने पूरा किया है
वैसे यहाँ ना कोई पूछता है कौन हो तुम ?
कहाँ से आए हो तुम?
मंदिर की घंटी बजते ही मन को शान्ति और जिन्दगी की सारी समस्याओं की हर गाँठ मानो खुद ही खुल जाती है
आश्रम की मिट्टी में कुछ तो अलग है ना
तभी तो यहाँ से लौटते वक्त आँखें नम और दिल हल्का हो जाता है
पूज्य बाबा जी हमारी तो सारी उम्मीदें भी आप हो
हमने आपके दरबार में आकर वास्तविकता को पहचाना है
दर पर आने से हमारी सारी समस्याएँ खुद ही सुलझ जाती हैं
फिर भी बाबा जी जब भी जिंदगी में हमारे रास्ते बंद हो जाए आगे हमें कुछ समझ ना आए तब बुला लेना आप अपने दरबार पर और कहना आ जाओ तुम अब तुम्हें नया रास्ता बताएं
तुम्हें मंजिल तक पहुंचाएँ
आपके धाम आकर समझ आया बाबा जी ये दुनियाँ तो बस रास्ते दिखाती है
आप तो मंजिल तक पहुँचाते हैं !!
🌸जय बाबा नीम करोली महाराज 🌼
धन्यवाद
राकेश उप्रेती
अल्मोड़ा उत्तराखण्ड

