

अल्मोड़ा/लमगड़ा: शासन द्वारा हाल ही में जारी की गई नई समय-सारणी को लेकर उत्तरांचल स्टेट प्राईमरी टीचर्स एशोसिएशन, शाखा-लमगड़ा (अल्मोड़ा) ने गहरा रोष व्यक्त किया है। संगठन का स्पष्ट कहना है कि यह नई व्यवस्था छोटे बच्चों के मनोविज्ञान और पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बिल्कुल विपरीत है।
प्रमुख आपत्तियां: बच्चों के भविष्य और सुरक्षा पर संकट
संगठन के अध्यक्ष गणेश सिंह भंडारी, मंत्री मनोज शर्मा और कोषाध्यक्ष मदन मोहन शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए मांग पत्र में निम्नलिखित गंभीर बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:
बाल मनोविज्ञान के विरुद्ध: प्राथमिक स्तर के बच्चों की एकाग्रता क्षमता केवल 20-30 मिनट होती है। लंबी और कठोर समय-सारणी बच्चों को मानसिक रूप से थका रही है, जिससे उनकी पढ़ाई में रुचि खत्म हो रही है।
सुरक्षा का खतरा (गुलदार का खौफ): लमगड़ा और आस-पास के क्षेत्रों में गुलदार (तेंदुए) का भारी आतंक रहता है। सुबह जल्दी और देर शाम तक स्कूल होने के कारण, पैदल स्कूल आने-जाने वाले छोटे बच्चों की जान को खतरा बना रहता है।
संसाधनों की कमी: एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जिन विद्यालयों में बिजली, पंखे और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं, वहां बच्चों को इतनी देर तक बैठाना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
नियमों का उल्लंघन: यह समय-सारणी शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 और नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना ‘तनावमुक्त शिक्षा’ के खिलाफ है।
अतिरिक्त कार्यभार: शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों (जैसे पोर्टल अपडेट, सर्वे, जनगणना) में व्यस्त रखने से शिक्षण की गुणवत्ता गिर रही है।
संगठन की दो-टूक मांग
उत्तरांचल स्टेट प्राईमरी टीचर्स एशोसिएशन, लमगड़ा ने विभाग से मांग की है कि:
प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के लिए पृथक-पृथक समय-सारणी बनाई जाए।
विशेष रूप से कक्षा 1-2 के बच्चों के लिए समय को लचीला और कम रखा जाए।
स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम (गर्मी-ठंड) को ध्यान में रखते हुए बदलाव किए जाएं।
“यह समय-सारणी बच्चों के स्वास्थ्य, नींद और पोषण को प्रभावित कर रही है। यदि इसमें तुरंत संशोधन नहीं किया गया, तो संगठन बच्चों और शिक्षकों के हित में उग्र कदम उठाने को विवश होगा।”
— गणेश सिंह भण्डारी,अध्यक्ष उत्तरांचल स्टेट प्राईमरी टीचर्स एशोसिएशन, लमगड़ा

