सावधान-: ओमिक्रोन के रैपिड टेस्ट को लेकर दुनिया में छिड़ी बहस, जानिए शोधकर्ताओं की राय

कोरोना की बढ़ती रफ्तार ने तथा इसके नए वेरिएंट ने लोगों को एक बार फिर घरों में कैद रहने को मजबूर कर दिया है| लोग अब घर पर ही एंटीजन टेस्ट कर रहे हैं|


आपको बता दें की एक अध्ययन में यह एंटीजन टेस्ट की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए गए हैं| इसके अलावा कुछ शोधों में यह बताया गया है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट ओमिक्रोन का पता लगा सकते हैं, तो वहीं कुछ ने यह बताया है कि एंटीजन टेस्ट अन्य की तुलना में कम संवेदनशील हो सकता है|


कुछ समय पहले हुए शोध में यह पता चला है कि संक्रमण के शुरुआती दिनों में रैपिड एंटीजन टेस्ट अधिक नेगेटिव रिपोर्ट दे सकता है| वही एक और अध्ययन के प्रारंभिक आंकड़ों से यह पता चला है कि टेस्ट करने पर पॉजिटिव रिपोर्ट से पहले भी लोग संक्रमित हो सकते हैं| अगर आप सटीक परिणाम चाहते हैं तो कुछ दिनों में परीक्षण करना जरूरी हो सकता है|


आइए जानते हैं कि शोधकर्ताओं की क्या राय है-: एंटीजन टेस्ट को लेकर अध्ययन का प्रारंभिक डाटा तो मिलाजुला है| अध्ययन में दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग परीक्षणों को देखा गया है| जिसका कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाना मुश्किल हो गया है|
(1) प्रीप्रिंट अध्ययन से ओमिक्रोन और अन्य वेरिएंट से संक्रमित लोगों के नमूनों के साथ एंटीजन परीक्षणों के प्रदर्शन की जांच की गई है| जिसमें पाया गया कि ओमिक्रोन का पता लगाने में परीक्षण कम संवेदनशील है| जर्नल ऑफ क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के अध्ययन में ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने 10 टेक्स्ट किए|


(2) अमेरिका खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दिसंबर के अंत में कहा था कि, शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि एंटीजन टेस्ट ओमिक्रोन का पता लगा सकती है, लेकिन संवेदनशीलता कम हो सकती है| यह बयान एमोरी विश्वविद्यालय में अनुसंधान से प्राप्त अप्रकाशित डाटा पर आधारित है|


(3) एनआईएच के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बायोमेडिकल इमेजिंग एवं बायोइंजीनियरिंग के निदेशक ब्रूस बर्ग ने संवेदनशीलता पर सवाल उठाए थे, उन्होंने बताया कि जब शोधकर्ताओं ने ओमीक्रोन और डेल्टा के नमूनों को मिलाया तो एंटीजन टेस्ट डेल्टा वेरिएंट का पता लगाने में बेहतर साबित हुआ था|


आइए जानते हैं कि रैपिड टेस्ट कम संवेदनशील क्यों है-:


प्राकृतिक या टीका लेने से एंटीबॉडी बनने के बाद लोग ओमीक्रोन से संक्रमित हो रहे हैं| इसलिए तीन-चार दिन बाद ही संक्रमण का पता चलेगा| वही यूसीएलए हेल्थ सिस्टम के क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के निदेशक ओमई गार्नर ने भी यही बात कही है| डॉक्टर ऐडम्स ने कहा कि संक्रमित होने के बाद लोगों के लक्षण उभरने में 12 से 24 घंटे लग सकते हैं|