
भारत में सरकार के हस्तक्षेप के बाद खाद्य तेल की कीमतें लगातार नीचे आ रही है| और रबी सत्र की सरसों की बेहतर फसल आने के बाद कीमतों के और घटने की उम्मीद जताई जा रही है|
खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने गुरुवार को अन्य आवश्यक खाद्य वस्तुओं के मामले में कहां की चावल और गेहूं की खुदरा कीमतें बहुत स्थिर हैं| जबकि दालों की कीमत है स्थिर हो गई है| सब्जियों खासकर प्याज, आलू और टमाटर की खुदरा कीमतों में भी कमी आई है| संवाददाता सम्मेलन के दौरान पांडे ने कहा कि जो संकेत हैं उससे पता चलता है कि हर घर में खाई जाने वाली सभी प्रमुख जरूरी सब्जियों की कीमतों के मामले में स्थिरता सामान्य होने जा रही है और हमें इन सब्जियों की कीमतों में किसी बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद नहीं है| सचिव ने खाद्य तेलों के मामले में कहा कि जब देश अपनी खाद्य तेलों की आवश्यकता के लिए लगभग 60% भाग का आयात करने पर निर्भर है तो घरेलू कीमतें स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय कीमतों से प्रभावित होगी|
सुधांशु पांडे ने कहा कि सरकार ने खाद्य तेलों के मामले में आयात शुल्क घटाकर लगभग शून्य कर दिया है और इसका कुदरा मूल्य में बहुत महत्वपूर्ण कमी दिखाई है| सरकार द्वारा अंश धारकों के साथ कई बैठकें करने के बाद कुदरा खाद्य तेल की कीमतों में 15 से 20% की कमी आई है| उन्होंने कहा कि खाद्य तेल उद्योग के इतिहास में पहली बार वैश्विक कीमतें उच्च स्तर पर चल रही है|
भारत का घरेलू तिलहन उत्पादन इस साल बढ़ने की उम्मीद है| क्योंकि मौजूदा रबी सत्र में सरसों की बुवाई 1 साल पहले की तुलना में लगभग 32% अधिक है| सचिव ने कहा कि हम आने वाले महीनों में सरसों की अधिक फसल होने की उम्मीद कर रहे हैं| इससे निश्चित रूप से कीमतों में कमी आएगी| उन्होंने कहा कि सरकार साप्ताहिक आधार पर अपनी नियमित अंतर मंत्रालयी बैठकों में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों की बहुत बारीकी से निगरानी कर रही है| इसलिए आने वाले समय में सरसों की तेल की कीमत कम होने की उम्मीद जताई जा रही है|

