
गरुड़ (बागेश्वर) । बागेश्वर जिले की तहसील गरुड़ में वर्ष 2010 में स्थापित कत्यूर गौ सेवा समिति आज तक भी मूलभूत समस्याओं को तरसती नजर आ रही है। पूर्व में घर गांवों एवं बाजारी क्षेत्रों में गौवंशीय पशुओं द्वारा शाक भाजी एवं फसलों के नुकसान को देखते हुए गरुड़ क्षेत्र के समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों की एक बैठक आयोजित की गयी थी जिसमें जगदीश जोशी की अहम् भूमिका रही थी। परिणाम स्वरूप कत्यूर गौ सेवा समिति चक्रवृत्तेश्वर- गरुड़ का गठन किया गया । क्षेत्र के सभी ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों के आपसी सहयोग से गौशाला के लिए चक्रवृत्तेश्वर के पास आवारा मवेशियों के संरक्षण का कार्य शुरू किया गया। तब से लेकर अभी तक समिति गौवंशीय पशुओं का संरक्षण करती आ रही है। वर्तमान में इस गौ सदन में 64 गौवंशीय पशु है।
समिति के अध्यक्ष विनोद काण्डपाल ने बताया कि चक्रवृत्तेश्वर- मंदिर के पास गोमती नदी के किनारे बने इस गौसदन में कर्मचारियों के लिए रहने को कक्ष नहीं,पेयजल के लिए एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है । बरसात के समय नदी में प्रवाहित गंदा पानी पशुओं के लिए उपयुक्त नहीं रहता। गोबर संरक्षण के लिए टैंक नहीं है। चारदीवारी नहीं होने से कभी -कभी गौसदन के पशु आसपास के काश्तकारों के खेत-खलिहानों के चले जाते हैं जिससे समिति के कर्मचारियों को लोगों की खरी-खोटी भी सुननी पड़ती हैं।जनता का रुझान अब गौवंशीय संरक्षण के लिए पूर्व की भाति नहीं मिल पा रहा है। जिससे समिति की मुश्किलें बड़ गयी हैं।
गौसदन में विद्युत व्यवस्था का अभाव,गौसदन के खिड़कियां, दरवाजों का खस्ता-हाल हैं। पशुओं के लिए चारा लाने को सड़क नहीं होने के कारण ढ़ुलान में भारी खर्च लग जाता हैं। वर्तमान में समिति के तीन कर्मचारी पशुओं की देखरेख करते हैं। समिति के पास अपनी आय के कोई भी श्रोत न होने के कारण समिति कठिन दौर से गुजर रही हैं।
समिति के अध्यक्ष विनोद काण्डपाल, सचिव भुवन कैड़ा एवं कोषाध्यक्ष महेश बिष्ट ने उत्तराखंड सरकार से कत्यूर गौ सेवा समिति को गौ सदन को विकसित करने हेतु कक्षों के निर्माण, कर्मचारियों के लिए आवास,नदी किनारे चारदीवारी,पेयजल, विद्युत की व्यवस्था के साथ ही पशुचारा उपलब्ध कराये को आर्थिक सहायता दी जाने की मांग की हैं।

