
यह बहुत ही दुखद घटना है कि उत्तराखंड ने एक बार फिर अपने वीर सपूत को खो दिया है बहुत ही दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि सीडीएस बिपिन सिंह रावत अब हमारे बीच नहीं रहे। मगर उनके कार्यों व अदम्य साहस के कारण वे हमेशा उत्तराखंड और भारत के दिलों में रहेंगे। सीडीएस विपिन सिंह रावत ने सेना में जाने के बाद भारत और अपनी जन्म भूमि उत्तराखंड के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उनके द्वारा सेना में जाकर देश की सेवा करने के इच्छुक उत्तराखंड के युवाओं के पक्ष में निर्णय लेकर कई उत्तराखंड के युवाओं का वर्दी पहनने का सपना साकार किया। ऊंचाई मानकों में 5 सेंटीमीटर की छूट के फैसले में हामी भरकर उन्होंने कई युवाओं के सपने साकार किए।
उत्तराखंड के पौड़ी में जन्मे विपिन सिंह रावत का ना सिर्फ अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड बल्कि वहां के लोगों के साथ भी काफी लगाव रहा तथा बीते 1 दिसंबर को विपिन सिंह रावत उत्तराखंड गढ़वाल विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए थे। न सिर्फ ऊंचाई मानकों में छूट देना बल्कि सीडीएस द्वारा कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए जैसे कि पिथौरागढ़ में बीआरओ की स्थापना के लिए सहमति देना, तथा उत्तराखंड के दोनों मंडलों कुमाऊं और गढ़वाल में टेरिटोरियल आर्मी की 1-1 बटालियन की स्थापना के लिए हामी भरना, तथा उत्तराखंड में गोरखा रेजीमेंट का भर्ती सेंटर खोलना और भी कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले हैं जो विपिन सिंह रावत द्वारा देश व उत्तराखंड के लिए लिए गए।

