विश्व टी. बी. जागृति दिवस के उपलक्ष में दिल्ली से आया पहाड़ी लेख

उत्तराखंड राज्य की दो प्रसिद्ध बोलियां कुमाऊनी और गढ़वाली में आजकल लोग काफी कम बातचीत कर रहे हैं। पहाड़ी बोली को संरक्षण देना हमारा कर्तव्य है इसलिए हमारे कूर्मांचल अखबार में हम आने वाले समय में कुछ समाचार कुमाऊनी भाषा में भी आप लोगों तक पहुंचाएंगे ताकि कुर्मांचल अखबार कुमाऊनी बोली के संरक्षण में अपना योगदान दे सके। इसी प्रयास के साथ आगामी 24 मार्च को टी.बी. दिवस के उपलक्ष में एक कुमाऊनी लेख हम आप तक पहुंचा रहे हैं जो कि निम्नवत है।

दिल्ली बै चिठ्ठी ऐ रै

विश्व टी बी जागृति दिवस २४ मार्च

  सजाग रै बेर क्षय रोग है बचि सकछा । आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कालेज पुने में वर्ष १९६८ में मील पैल बार टी बी (क्षय या तपेदिक रोग) क नाम सुनौ | प्रशिक्षण में बताई गो कि य एक खतरनाक संक्रामक रोग छ जो प्रत्यक्ष या परोक्ष छुआछूतल फैलूं । तब टी बी क रोगी हैं लोग बात करण और उकैं घर में धरणक लै परहेज करछी | कुछ दिनों क बाद मीकैं टी बी क रोगियों कि स्याव करणक मौक मिलौ जबकि लोग उनार नजीक जाण में लै घबरां छी | आपण बचाव करनै क्वे लै उनू दगै सकुशल रै सकूं और उरातार दवाइल इलाज करनै बीमार लै बिलकुल ठीक है सकूं |

  क्षय रोग हैं ट्यूबरकुलोसिस लै कौनी जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूब्रीकल नाम क बैक्टीरियाल फैलूं | य रोग क्वे लै उम्र में कै कणी लै है सकूं | क्षय रोग ८० प्रतिशत फेफड़ों (पल्मोनरी टी बी ) पर लागूं जबकि शरीरक क्वे लै हिस्स जस कि गुर्द, हड्डी, आंत, गर्भाशय आदि में लै है सकूं | रोगाक मुख्य लक्षण हुनी लगातार सूखी खांसी, बुखार, वजन कम हुण, रात कै पसिण औण, छाती में पीड़, भुक कम लागण और छ्वाट- छ्वाट सांस ल्हीण | य एक मध्यम गतिक संक्रामक रोग छ जो हावल (सांस द्वारा) फैलूं | बीमाराक फेफड़ में अड्ड जमाई रोगाणु वीक सांस में, खासणल या छींक में भ्यार औनी जैल वीक आस पास कि हाव में ऊँ फैली जानी | उ हाव कैं जब स्वस्थ व्यक्ति सांस ल्युंछ तो यूं रोगाणु वीक फेफड़ में घुसी बेर उकैं बीमार बनै दिनी | 

 विश्व स्वाथ्य संगठन क वर्ष २०१४ क आंकलन क अनुसार हमार देश में क्षय रोगल लगभग २२ लाख लोग ग्रसित छीं जबकि यौ रोगल देश में हर साल द्वि लाख बीस हजार मौत हुनी जो दुनिय में सबूं है ज्यादै छीं | रोगियोंक सही अनुमान लगूण मुश्किल छ किलैकि कएक बीमार प्राइवेट अस्पतालों में लै इलाज करवै ल्हीनी और कुछ लोग त इलाज लै नि करून, द-द्याप्त जागर लगूनी या नीम-हकीमों और टोटका मास्टरोंक पास जानी |

क्षय रोग है बचण क लिजि बी सी जी क टिक नना कैं जन्म बटि तीस दिन क अंदर सरकारि टीकाकरण केंद्र में मुफ्त लगाई जांछ जबकि प्राइवेट अस्पतालों में लै यौ टिक लगाई जांछ |  अगर हाम साफ़-सफाई धरूं, प्रत्यक्ष या परोक्ष धूम्रपान और नश नि करूं, हवादार (क्रॉस वेंटीलेसन ) घर में रौण कि व्यवस्था करूं, नना कैं जन्म लेते ही टिक लगवै द्यूं और स्वच्छ संतुलित आहार ल्हीनै रूं तो क्षय रोग है बचि सकनूं | लगातार खांसणी मनखियों हैं एक आंखर हाम यौ त कै सकनूं कि 'जा यार एक ता आपूं कैं सरकारि अस्पताव में देखै आ ।' 

पूरन चन्द्र कांडपाल
23.03.2024