
उत्तराखंड राज्य में सरकारी कर्मचारियों के अनिवार्य तबादले के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई और बैठक में विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव तथा अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान तय हुआ कि मैदानी क्षेत्र से जितने कर्मचारी पहाड़ में आएंगे उतने ही पहाड़ों से मैदान में जाएंगे यानी कि जितने भी कर्मचारी सुगम से दुर्गम में जाएंगे उतने ही शिक्षक कर्मचारी दुर्गम से सुगम में आएंगे। स्थानांतरण सत्र के दौरान कितने शिक्षकों और कर्मचारियों का तबादला होगा यह विभाग के विवेक पर छोड़ दिया गया है। सतर्कता विभाग की बैठक में सभी विभागीय अधिकारियों से रायशुमारी की गई और कार्मिक विभाग की ओर से जानकारी दी गई की स्थानांतरण एक्ट में तबादलों का कोटा निर्धारित करने का प्रावधान नहीं है लेकिन एक्ट लागू होने के बाद कर्मचारियों की तैनाती में संतुलन स्थापित करने के लिए शुरूआत में दस फीसदी तबादले किए गए और कोविड काल में शून्य सत्र होने के बाद इसे बढ़ाकर 15 फ़ीसदी कर दिया गया। इस तरह होते-होते अब तक 65 फ़ीसदी तबले हो चुके हैं और बैठक में यह तय किया गया कि विभाग अपने स्तर पर तबादलों की संख्या निर्धारित करेगा और शर्त यह रखी गई कि जितने शिक्षक कर्मचारी सुगम से दुर्गम में भेजे जाएंगे उतने ही दुर्गम से सुगम में भी आएंगे।
