
उत्तराखंड राज्य में एक ऐसा मामला सामने आया है जहां रुड़की में हत्या और लूट के प्रयास में 2003 में आरोपित को सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराया था और हत्या के मामले में 13 साल जेल में बंद कैदी को हाईकोर्ट ने अब रिहा करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने पाया कि अपराध के समय दोषी नाबालिक था जिसके कारण उसे दी गई आजीवन कारावास की सजा कानूनी तौर पर वैध नहीं है। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्याय मूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई की गई। यह मामला 2003 का है जब आरोपित को हत्या और लूट के मामले में दोषी ठहराया गया था और 2013 तक हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस सजा को बरकरार रखा बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि की थी। 2021 में जेल से एक प्रार्थना पत्र भेजकर आरोपी ने दावा किया कि घटना की तिथि को वह नाबालिक था इसके बाद इस मामले में छानबीन की गई और पाया कि वास्तविक में आरोपी उस समय नाबालिक था जिसके चलते उसकी सजा वैध नहीं है और हाईकोर्ट ने तत्काल उसकी रिहाई के आदेश दिए हैं।

