Uttarakhand- क्या गांवों में नहीं पढ़ाना चाहते शिक्षक….. किसी और के हाथों स्कूल छोड़ गायब हुई प्रधानाध्यापिका

उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी इलाकों में शिक्षकों को पढ़ाना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है। इस बात का प्रमाण यह है की पौड़ी जिले के थलीसैंण ब्लॉक में एक राजकीय प्राथमिक विद्यालय बगवाड़ी में स्कूल के टीचर अपनी जगह गांव में रहने वाली एक लड़की को छोड़ गए। बता दें कि गांव के स्कूल की प्रधानाध्यापिका ने ढाई हजार रुपए प्रति महीने तनख्वाह पर गांव की एक लड़की को अपनी जगह स्कूल में पढ़ाने के लिए रखा है।

उत्तराखंड राज्य में शिक्षा विभाग द्वारा लाखों प्रयास किए जाते हैं कि शिक्षक गांव में अच्छे से बच्चों को शिक्षा दें लेकिन फिर भी अध्यापक पहाड़ में ड्यूटी ज्वाइन नहीं करना चाहते हैं और अगर ज्वाइन करते भी है तो वह अपनी जगह आसपास के किसी व्यक्ति को पढ़ाने के लिए रख देते हैं फिर अपना खुद गायब हो जाते हैं ।कुछ ऐसा ही मामला पौड़ी से आया है जहां पर गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका ने अपने स्थान पर एक गांव की लड़की को पढ़ाने के लिए रख दिया तथा उसे ढाई हजार रुपए प्रतिमाह तनख्वा देने लगी। प्रधानाध्यापिका की इस हरकत पर मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा यह आदेश दिया गया कि प्रधानाध्यापिका का वेतन रोक दिया जाए।
प्रधानाध्यापिका की इस हरकत का खुलासा तब हुआ जब बीते मंगलवार को सीईओ डॉ आनंद भारद्वाज ने गांव के इस स्कूल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि वहां पर प्रधानाध्यापिका शीतल रावत द्वारा अपने स्थान पर बच्चों को पढ़ाने के लिए गांव की ही एक लड़की को रखा है और उस लड़की को प्रधानाध्यापिका द्वारा प्रतिमाह ढाई हजार रूपए वेतन दिया जाता है।