
अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले में तिमूर के संरक्षण के लिए तिमूर सेंचुरी स्थापित होगी| जिसकी कवायद जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान ने शुरू की है| दोनों जिलों में उत्तराखंड में पाई जाने वाली तिमूर की चारों प्रजातियों के पौध तैयार कर इसका संरक्षण किया जाएगा| जिसके बाद इन्हें किसानों को बांटा जाएगा| एक तरफ इसका संरक्षण होगा तो वहीं यह किसानों की आजीविका का जरिया भी बनेगा|
जीबी पंत संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक, अवैज्ञानिक तरीके से दोहन और पर्यावरण असंतुलन के कारण धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे औषधीय गुणों से भरपूर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिमूर के संरक्षण के लिए अल्मोड़ा जिले के हवालबाग और पिथौरागढ़ जिले में संस्थान इसकी सेंचुरी स्थापित कर रहा है| यहाँ इसके चारों प्रजातियों की पौध तैयार की जाएगी, जो किसानों को बांटी जाएगी| संस्थान की पहल पर पर्वतीय क्षेत्रों में विलुप्त हो रहे तिमूर के पौधे लहलहाएंगे, जो किसानों की आजीविका का स्रोत भी बनेंगे|
बता दें वर्तमान में संस्थान में स्थापित सेंचुरी में चारों प्रजाति की 500 पौध तैयार की जा रही है|
तिमूर बहुउयोगी है, जिसके संरक्षण की अत्यधिक आवश्यकता है| इसके संरक्षण के लिए संस्थान तिमूर सेंचुरी स्थापित कर इसका संरक्षण कर रहा है| यह किसानों की आजीविका का भी बेहतर जरिया बनेगा|

