लाउडस्पीकर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है फैसला……. जानिए इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

वर्तमान में अब हिजाब विवाद के बाद लाउडस्पीकर विवाद काफी चर्चाओं में है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही ध्वनि प्रदूषण पर रोक के मामले में अपने फैसले दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट के पहले फैसलों में उसका कहना था कि जबरदस्ती ऊंची आवाज यानी कि दूसरों को तेज आवाज सुनने के लिए मजबूर करना मौलिक अधिकार का हनन है।और यदि हम एक बार सुप्रीम कोर्ट के पहले फैसलों पर नजर डालें तो एक तय सीमा से अधिक तेज आवाज में लाउडस्पीकर नहीं बजाया जा सकता। बता दें कि ध्वनि प्रदूषण पर 18 जुलाई 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया था जिसमें उसने कहा था कि हर व्यक्ति को शांतिपूर्वक रहने का अधिकार है और शांति का अधिकार जीवन में मौलिक अधिकार का ही हिस्सा है। और किसी को भी शोर करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि एक व्यक्ति इतना शोर नहीं कर सकता कि उसके घर के बाहर उसके पड़ोसियों को उससे दिक्कत हो। क्योंकि अगर एक व्यक्ति के पास समाज में बोलने का अधिकार है तो दूसरे के पास सुनने से इनकार करने का अधिकार भी है। तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि सार्वजनिक स्थल पर लगे लाउडस्पीकर के आवास उसी क्षेत्रों तक सीमित रहे तथा तय मानकों से ज्यादा शोर ना हो। तथा ध्वनि प्रदूषण के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वकील विजय पंजवानी का कहना है कि कानून के अनुसार यदि कोई भी ध्वनि की सीमा का उल्लंघन करता है तो इसमें धारा 15 में सजा का प्रावधान भी है। इस कानून का उल्लंघन करने पर 5 साल की सजा और 100000 का जुर्माना भी है। तथा ध्वनि प्रदूषण होने पर पुलिस लाउडस्पीकर वाले परिसर में घुसकर लाउडस्पीकर जप्त भी कर सकती हैं।