
इस बार उत्तराखंड राज्य के जंगलों में मई-जून से पहले ही आग धधकने लगी है। वनों में आग की चुनौती इस बार ज्यादा मात्रा में देखी जा रही है। 15 फरवरी से अब तक प्रदेश के 107.25 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं और यदि वर्षा ना हुई तो जंगल में आग की घटनाएं और अधिक मात्रा में सामने आ सकती है। बता दें कि होली के दौरान भी फील्ड ड्यूटी से जुड़े वन कर्मियों को इस बार अवकाश नहीं मिला है और पर्वतीय क्षेत्र में आग के लिहाज से संवेदनशील जंगल की निगरानी को लेकर विशेष निर्देश मिले हैं तथा मैदानी क्षेत्रों में भी अराजक तत्व तथा तस्करों की घुसपैठ की आशंका है। जानकारी के मुताबिक बीते सोमवार तक उत्तराखंड राज्य में 67 घटनाएं आग की सामने आ चुकी हैं। जिसमें गढ़वाल का 40.68 और कुमाऊं का 35.55 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। कुमाऊं में नैनीताल, बागेश्वर और अल्मोड़ा के जंगल धधक रहे हैं और लगातार यहां के वातावरण में धुंध छाने लगी है। बीते रविवार को बागेश्वर जिला मुख्यालय से लेकर चंडिका धार और छतीना के जंगल चल रहे थे। आग की घटनाओं को देखते हुए फील्ड वन कर्मियों का अवकाश रद्द कर दिया गया है।

