
अपने आस-पास,परिवेश,पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखना हम सब की नैतिक जिम्मेदारी है। अपने पर्यावरण को साफ स्वच्छ रखने के लिए कृपाल सिंह शीला अपने स्तर से विगत वर्षों से छोटे-छोटे प्रयास करते आ रहे हैं। उनके द्वारा रास्तों में बच्चों द्वारा खाये गये विभिन्न खाद्य पदार्थों के रैपर्स को जमा कर उनका उपयोग बच्चों के खेलने के लिए प्लास्टिक की बॉल बनाने, पौध उगाने के लिए पॉली बैग बनाने व घर में चूल्हे व अंगीठी जलाने के रुप में कर रहे हैं।विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ चिप्स, ओ एस, कुरकुरे,लेज,टकाटक,हंक,मंच, विंगो टेढ़े- मेढे़,मनचूरियन,जू, एबीसीडी,क्रक्स,कचरी, लूटपाट, काला भूत, चाचा- चाची, पोला पापड़ आदि के रंगीन रैपर्सों से रास्ते भरे-पटे होने से जहाँ हमारे पर्यावरण को इनसे नुकसान पहुँचता है, वहीं रास्ते में चलने वाले लोगों के पाँव इन रैपर्सों में पड़ने से बहुत बार फिसल कर गिरने की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। ये रैपर्स अजैविक कूड़े के रुप में हमारे लिए एक बड़ी समस्या खड़ी कर देते हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए हम इनका कम उपयोग (रिड्यूस) व पुन: उपयोग (रि- यूज) करें। आओ हम सब भी अपने छोटे-छोटे प्रयासों से अपने पर्यावरण को साफ – स्वच्छ बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाये। जब हमारा पर्यावरण साफ – स्वच्छ रहेगा, तो हम सब भी स्वस्थ जीवन जीएंगे।

