
उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले में काकू के उत्पादों को बाजार न मिलने के कारण काश्तकारो की मेहनत पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है।
बता दें कि कृषि और उद्यान के क्षेत्र में अपने निजी प्रयासों से नए प्रयोग करने वाले काश्तकारों की मेहनत को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के प्रगतिशील काश्तकार एवं किसान काकू के उत्पाद को बाजार न मिलने के कारण परेशान है। बता दें कि सेहत के लिए रामबाण कहे जाने वाले काकू फल का पिथौरागढ़ में सफल उत्पादन किया है लेकिन बाजार न मिलने के कारण मेहनत पर पानी फिर रहा है। जिला मुख्यालय से 7 किलोमीटर दूर 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित मोस्टामानू निवासी इकबाल बख्श द्वारा नए प्रयोग के तहत काकू फल के पौधे लगाए गए। रामगढ़ से लिए गए पौधों में सफल उत्पादन देख उन्होंने पिथौरागढ़ में ही इस फल की अच्छी मांग की संभावना को देख 150 पेड़ लगाए और अब पेड़ों से अच्छा उत्पादन हो रहा है लेकिन उत्पाद को बाजार न मिलने के कारण काश्तकार काफी चिंतित है। उनका कहना है कि फल जनवरी प्रथम सप्ताह तक ही टिका रहता है इसके बाद वह खराब होने लगता है लेकिन नए फल के प्रचार प्रसार में उद्यान विभाग ने भी कोई मदद नहीं की। पिथौरागढ़ जनपद के मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में इस फल की अच्छी पैदावार हो सकती हैं और जिले को इस फल के उत्पादन से एक नई पहचान मिल सकती है लेकिन बाजार न मिलने के कारण काश्तकार काफी चिंतित हैं।

