
प्रस्तुति – रमेश चन्द्र पाण्डेय (बृजवासी)
बाल मन की अभिलाशाऐसा बैग दिला दो अम्मा, जिसमें खाने चार हों!
किसी में कापी कहीं किताबें, रबर पेंसिल का भंडार हो !!ऐसा०!!
एक अच्छी सी जेब हो जिसमें, टिफन मेरा समा जाये,
शान से जब मैं निकलूं घर से, टाॅमी भी मेरे संग आये,
टिफिन बॉक्स में लंच हो मेरा,चम्मच जैम और अचार हो !ऐसा०!!
हिंदी पढूंगा गणित करूंगा, विज्ञान भी मुझको भाता है,
Alphabet हो या वर्णमाला,भूगोल भी मुझको आता है,
बस्ता ऐसा बनाऊंगा मैं, जिसमें अधिक ना भार हो !ऐसा०!!
कापी क़िताबें रखूं ऐसे, जिनमें धब्बा ना दाग हो,
मेरी कापी मेरी पुस्तक, उनसे मुझे अनुराग हो,
स्कूल ड्रेस हो सबसे सुंदर,सबसे मधुर व्यवहार हो !ऐसा०!!
गुरुजनों के रहूं सामने, ध्यान लगा कर पढ़ा करूं,
शिष्टाचार सदा अपनाऊं , जब भी किसी से बात करूं,
नये साल में रहूं मैं आगे, नहीं कभी मेरी हार हो !ऐसा०!!
जब भी मैं बस्ते को खोलूं, सारी चीज़ें संवरी हों,
नहीं दुखाऊं दिल मैं किसी का,वाणी मेरी मीठी हो,
सायंकाल की कार्यशाला में, बाल प्रहरी सा परिवार हो !ऐसा०!!
प्रकाश पाण्डेय
कनखल (हरिद्वार)

