
बागेश्वर । प्राकृतिक संपदा और समृद्ध पक्षी विविधता अब जनपद के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। इसी दिशा में जौलकांडे गांव में दो दिवसीय एडवांस बर्ड वॉचिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया, जिसके माध्यम से क्षेत्र को इको-टूरिज्म के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य विकास अधिकारी आरसी तिवारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि स्थानीय प्रतिभा को उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी प्राकृतिक विरासत के माध्यम से न केवल स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकते हैं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की पक्षी विविधता में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व प्रधान दरबान सिंह बिष्ट एवं वर्तमान ग्राम प्रधान संजीव कुमार उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत जौलकांडे क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ पक्षियों की तस्वीरों से सुसज्जित स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया।
जिला पर्यटन विकास अधिकारी पीके गौतम ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि जौलकांडे शीघ्र ही एक प्रमुख बर्ड वॉचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य युवाओं को प्रकृति से जोड़ते हुए उन्हें इको-टूरिज्म के क्षेत्र में पेशेवर गाइड के रूप में तैयार करना है।
दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में कौसानी, बागेश्वर एवं जौलकांडे क्षेत्र के कुल 15 चयनित छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पक्षियों की पहचान, उनके व्यवहार, आवास एवं संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जा रही है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वरिष्ठ ट्रेनर राजेश भट्ट एवं उत्तराखंड के प्रसिद्ध बर्ड वॉचर राजीव बिष्ट द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जो फील्ड विजिट के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव भी उपलब्ध करा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान अन्य विभागीय अधिकारी एवं स्थानीय ग्रामीण भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पंकज शर्मा एवं सीमा शर्मा द्वारा किया गया।

