अल्मोड़ा:- सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे ने मेडिकल कॉलेजो में नियुक्ति को लेकर दिखाए आएना….. कहा जनता को मिलने चाहिए उनके अधिकार

अल्मोड़ा। जिले के सामाजिक कार्यकर्ता संजय पांडे अपने प्रयासों से जनता तक सभी सुख सुविधाओं को पहुंचाना चाहते हैं। बता दे कि उन्होंने पहले भी कई बार चिकित्सा सेवाओं को लेकर आवाज उठाई है। उन्होंने कई बार सरकारी अस्पतालों की बदहाली को सुधारने का प्रयास भी किया है। बता दे कि उन्होंने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की अवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं तथा प्रमाणित शिकायतों के आधार पर प्रशासनिक सुधार करने में भी सफलता अर्जित की है।

संजय पांडे का कहना है कि जिले में अस्पताल हो या फिर मेडिकल कॉलेज जब तक नागरिक समाज सजग होकर स्वास्थ्य तथा चिकित्सा के अधिकारों के प्रति संघर्ष नहीं करेगा तब तक उन्हें कुव्यवस्थाओं का ही शिकार बनना पड़ेगा। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी को लेकर भी आवाज उठाई हैं। उनका कहना है कि सेवाओं में जो पद भरे जाते हैं उसकी जानकारी जनता को होनी चाहिए तथा उन्होंने सरकार से हर बार होने वाली नियुक्ति और तैनाती को सार्वजनिक करने की मांग भी की है। उन्होंने उत्तराखंड राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त 339 पदों पर गहन पड़ताल की और एक चिकित्सक दंपति का उदाहरण देते हुए शासन को स्पष्ट किया है कि पहाड़ आने के एक योग्य डॉक्टर दंपति को चयन के बाद भी तीन माह तक नियुक्ति नहीं मिली जिसके बाद वह अन्य राज्य में चले गए। सीएम हेल्पलाइन में प्रमाणित दस्तावेजों के साथ शिकायत कर उन्होंने फिलहाल इस चयन प्रक्रिया तक पारदर्शिता का तंत्र विकसित कर लिया है।

उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर की वेटिंग लिस्ट एवं राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय को रिजल्ट के संबंध में पारदर्शिता की प्रणाली स्थापित करने में सफलता भी अर्जित की है। संजय पांडे का कहना है कि राज्य के सभी राजकीय चिकित्सा शिक्षा संस्थान द्वारा संकलित सदस्यों की साक्षात्कार की विज्ञप्ति वेबसाइट पर ऑनलाइन डाली जाती थी लेकिन साक्षात्कार का परिणाम कभी भी संबंधित राजकीय चिकित्सा संस्थान द्वारा उनकी ऑनलाइन वेबसाइट पर ही डाला जाता था जिसकी वजह से उनके एक परिचित विशेषज्ञ डॉक्टर अयान शर्मा का असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन होने के पश्चात भी अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने उन्हें तीन माह तक इस बारे में सूचित नहीं किया और उनकी पत्नी भी स्त्री रोग विशेषज्ञ है उनके साथ राजकीय मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा में ज्वाइन होकर पहाड़ में सेवा देने हेतु वह इच्छित थे परंतु जब इंटरव्यू के पश्चात तीन माह का समय बीत गया तो उन्होंने हताश होकर कहीं और ज्वाइन कर लिया। मेडिकल कॉलेज में उन्होंने फैकल्टी को लेकर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि अल्मोड़ा से अभी भी मरीज को रेफर कर दिया जाता है यह काफी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि जब संकाय सदस्य ही नहीं है तो MBBS के विद्यार्थी कैसे दाख़िला लेंगे। पहले संकाय सदस्य आएंगे फिर MBBS के विद्यार्थी आएंगे तब जाकर पढ़ाई चालू होगी।