
अल्मोड़ा। महिला कल्याण संस्था अल्मोड़ा की बैठक में महिलाओं ने बंदरों एवं कुत्तों के आतंक को देखते हुए निर्णय लिया कि एक बार फिर हमें आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा जो कि प्रशासन से वार्ता के बाद स्थगित कर दिया गया था। जिसमें एसडीएम द्वारा वार्ता में कहा गया था की अल्मोड़ा में परमानेंट वेटरनरी डॉक्टर की पोस्टिंग की जाएगी तथा हर दिन बंदर व कुत्तो को पकड़कर उनका बंध्याकरण किया जाएगा परंतु अभी तक कोई भी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है। साथ ही यह भी कहा गया था कि बंदर बाड़ा बनाकर पहले बंदरों का बंध्याकरण करके उसमें रखा जाएगा जब बंदर ठीक हो जाएंगे तो उन्हें जंगलों में जाकर छोड़ दिया जाएगा लेकिन साल गुजर जाने के बाद भी अभी तक ना किसी डॉक्टर की नियुक्ति हुई है और ना ही बाड़ा बनाया गया है। साथ ही यह भी कहा गया था कि बंदर पकड़ने में बहुत खर्च आता है इसलिए वन विभाग के ही कुछ लोगों को बंदर, कुत्तों को पकड़ने की ट्रेनिंग दी जाएगी ।
दिनों दिन बंदरों एवं कुत्तों के आतंक से जनता परेशान है। बंदर घर से सामान उठाने के साथ ही लोगों को काट भी रहे हैं व कुत्ते राह चलते लोगों पर झपट रहे हैं। बंदर स्कूल जाते बच्चों को भी परेशान कर रहे हैं। हॉस्पिटल में कुत्तों के काटे एवं बंदरों के काटे लोगों की संख्या बढ़ रही है । कई बार ज्ञापन देने के बाद भी अभी तक इसमें कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है।
सरकार को हर जिले में एक वेटरनरी डॉक्टर की नियुक्ति करनी चाहिए क्योंकि यह केवल अल्मोड़े का मामला ही नहीं है बल्कि हर जगह बंदरों व आवारा कुत्तों के आतंक से लोग परेशान हैं। इसके लिए सरकार को हर जिले में एक वेटरनरी डॉक्टर की नियुक्ति करनी चाहिए और बंदरों व कुत्तों के बंध्याकरण की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए। बैठक की अध्यक्षता रीता दुर्गापाल द्वारा की गई एवं संचालन पुष्पा सती द्वारा किया गया। बैठक में सुनैना मेहरा, ममता चौहान , आशा कर्नाटक ,आशा पंत, मंजू जोशी, दीपा, सतीश जोशी, मंजू रावत, चंद्रा अग्रवाल, दीपा जोशी, अनुराधा अग्रवाल, अंजू अग्रवाल, अदिति अग्रवाल, गीता शाह, रेखा चौहान ,रमा जोशी, राधिका जोशी, सरला बिष्ट आदि उपस्थित रहे।

