अल्मोड़ा:- राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन एवं स्थायी चित्र प्रर्दशनी का भव्य शुभारम्भ

आयोजक : संस्कृति विभाग उत्तराखंड, उदय शंकर संगीत एवं नाट्य अकादमी,फलसीमा अल्मोड़ा।
विशेष सहयोग: चित्रकला विभाग सोबन सिंह जीना वि वि अल्मोड़ा।

शीर्षक: नृत्य सम्राट उदयशंकर के जीवन के विविध पक्ष भावमय रंगों के संग

दिनाक 08/12/205 को भारतीय नृत्य सम्राट उदय शंकर की स्मृति में चल रही सात दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य समापन आज प्रातः 11:00 बजे से उदयशंकर की स्मृति में बने कुल 80 चित्रों की लगाई गयी प्रर्दशनी के शुभ उद्घाटन एवं कार्यशाला स्मारिका के विमोचन के साथ किया गया ।
इस समारोह मुख्य अतिथि के रूप में आये प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट, कुलपति सोबन सिंह जीना वि वि , प्रोफेसर शेखरचन्द्र जोशी (विभागाध्यक्ष चित्रकला एवं संकायाध्यक्ष दृश्यकला) , डा. चन्द्र सिंह चौहान (सचिव, उदय शंकर नाट्य अकादमी, फलसीमा,अल्मोड़ा) एवं प्रोफेसर सोनू दिवेदी शिवानी ,कार्यशाला समन्वयक ने संयुक्त रूप से चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं समापन समारोह का शुभारम्भ उदयशंकर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया । अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ के साथ डा. चन्द्र सिंह चौहान ने किया उन्होंने प्रर्दशनी के चित्रों को अकादमी की अमूल्य धरोहर बताया सभी प्रतिभागी चित्रकारों एवं संगीत विधा के कलाकारों का स्वागतकर और आभार जताया । मुख्य अतिथि प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने चित्रों का अवलोकन किया और कहा कि यहां लगे सभी चित्र अत्यंत प्रभावशाली भावपूर्ण और कलात्मक है कुछ चित्र की बारिकियों को देखकर लगता है कि वो मशीन प्रिंट होंगे इन कलाकारों की जितनी भी प्रशंसा की जाये वो कम है मैं यहां लगे सभी चित्रों की बुकलेट तैयार कराकर राजभवन में आर्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमोशन के लिए प्रस्तुत करूंगा जिससे संगीत, नाट्य और दृश्यकला का अल्मोड़ा वि वि में समग्र विकास हो उन्होंने कार्यशाला चित्र प्रदर्शनी एवं भातखंडे संगीत महाविद्यालय के मनमोहक प्रस्तुति हेतु समस्त आयोजक मंडल को बधाई दी और आम जनसमूह से प्रर्दशनी का अवलोकन करने की अपील की ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर शेखरचन्द्र जोशी ने किया उन्होंने अपने मेरा संपूर्ण जीवन कला के उत्थान में समर्पित रहा है अपने संघर्ष को स्मरण कर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया तथा उत्तराखंड कला महाविद्यालय, तथा आर्ट गैलरी बनाने हेतु बात रखी और बताया कि मैनें स्वयं भी इस कार्यशाला में कलाकारों के उत्साहवर्धन हेतु प्रतिभागी के रूप में चित्र बनाया है यह मेरा एक अलग अनुभव रहा है उन्होंने प्रर्दशित सभी चित्रों और चित्रकारों की प्रशंसा की।
प्रोफेसर सोनू दिवेदी शिवानी, समन्वयक, कार्यशाला एवं चित्र प्रदर्शनी ने कार्यक्रम की पूर्ण रूपरेखा और उद्देश्य को बताया उन्होंने कहा कि कलाकार के पास आज मल्टीमीडिया के युग में अपनी कला से धनार्जन के अनेक प्लेटफार्म है किन्तु उसके कला से उसको व्यापक सम्मान, सामाजिक पहचान और मंचाधार शासन द्वारा आयोजित इस तरह के कार्यक्रम से ही मिल पाते हैं उन्होंने संस्कृति विभाग उत्तराखंड और उदयशंकर संगीत एवं नाट्य अकादमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कला -संस्कृति की नगरी में कला पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इससे भी व्यापक आर्थिक आधार के कार्यक्रम कराने की आवश्यकता है उन्होंने बताया कि यहां पर लगी चित्र प्रदर्शनी जिसके चित्रों के साथ प्रत्येक कलाकार का परिचय लगाया है एक स्थायी प्रदर्शनी है जिसके माध्यम से अब यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति चित्र और चित्रकार दोनों से सहजता से परिचित हो सकेगा ।
कार्यक्रम में मंच का कुशल संचालन डा. मीता उपाध्याय ने किया ।
चंचल तिवारी, (वरिष्ठ प्रवक्ता, कथक विधा), पूजा अंडोला (वरिष्ठ प्रवक्ता, भारतनाट्यम विधा) एवं जीवन चन्द्र आर्या (प्रवक्ता संगीत गायन) के निर्देशन में भातखण्डें हिन्दुस्तानी संगीत महाविद्यालय, अल्मोड़ा के छात्र -छात्राओं ने उदयशंकर के प्रिय नृत्य शिव तांडव, रामलीला, सरस्वती वंदना, भारत उदय आदि को अत्यंत आकर्षक मुद्रा के साथ प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जनमेजय तिवारी, प्रदर्शक व्याख्याता, राष्ट्रीय संग्रहालय, अल्मोड़ा ने कार्यक्रम कार्यों में अपना सहयोग प्रदान किया।
कार्यशाला समापन में प्रतिभागी कलाकारों को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाण -पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया ।
चित्र प्रदर्शनी के सफल संयोजन में विशेष सहयोग देने वाले युवा कलाकारों में मुख्य रूप से वीरेंद्र जोशी, शिवम जिंगाला, गौरव पांडे, पूरन मेहता, संतोष मेर , पवन सिंह सामन्त, योगेश डसीला, पवन यादव, सुनीता तिवारी आदि रहें है । यह चित्र प्रर्दशनी स्थायी रूप से उदयशंकर संगीत एवं नाट्य अकादमी फलसीमा अल्मोड़ा के भवन में लगी रहेगी जिसे आम जनसमूह कार्य दिवस में कभी भी जाकर देखें और कलाकारों के परिश्रम की सराहना कर उनका उत्साहवर्धन करें जिससे कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम कला और कलाकारों के उत्थान हेतु किये जाये ।